रतन टाटा के सबसे करीबी सहयोगी ने छोड़ा फैमिली ऑफिस! टाटा ग्रुप में मचा हड़कंप

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • रतन टाटा के करीबी सहयोगी मेहली मिस्त्री ने RNT एसोसिएट्स के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है
  • टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) से हटाए जाने के बाद यह उनका दूसरा बड़ा फैसला है
  • आइए जानते हैं कि RNT एसोसिएट्स क्या है और इस इस्तीफे से टाटा ग्रुप पर क्या असर पड़ सकता है?
Mehli Mistry Resigns Ratan tata

टाटा ग्रुप के दिवंगत चेयरमैन रतन टाटा के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले मेहली मिस्त्री (Mehli Mistry) ने अब रतन टाटा के फैमिली ऑफिस RNT एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड (RNT Associates Pvt Ltd) के बोर्ड से भी इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब कुछ महीने पहले ही उन्हें टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) से भी हटा दिया गया था। माना जा रहा है कि इस कदम के साथ मेहली मिस्त्री और टाटा ग्रुप के बीच सालों पुराना संबंध लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

मेहली मिस्त्री ने 30 जून 2026 को अपने इस्तीफे का पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने कहा कि अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के कारण वह 1 जुलाई 2026 से RNT एसोसिएट्स (RNT Associates) के निदेशक पद से इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में किसी विवाद का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनके इस फैसले को टाटा ग्रुप से लगातार बढ़ती दूरी के रूप में देखा जा रहा है।

RNT एसोसिएट्स (RNT Associates) कोई सामान्य कंपनी नहीं है। इसकी स्थापना 2009 में रतन टाटा ने अपने व्यक्तिगत निवेश (Family Investment Office) के लिए की थी। इसी कंपनी के जरिए रतन टाटा ने देश के कई बड़े स्टार्टअप्स में निवेश किया था। पेटीएम (Paytm), ओला (Ola), ब्लूस्टोन (BlueStone) जैसे कई चर्चित स्टार्टअप्स में RNT एसोसिएट्स (RNT Associates) की हिस्सेदारी रही है। कंपनी को अपनी आय मुख्य रूप से डिविडेंड और कंसल्टेंसी सेवाओं से होती है।

रतन टाटा के निधन से पहले उन्होंने अपनी व्यक्तिगत संपत्तियों और निवेशों को व्यवस्थित करने के लिए RTEF (Ratan Tata Endowment Foundation) और RTET (Ratan Tata Endowment Trust) का गठन किया था। आज RNT Associates की हिस्सेदारी इन्हीं संस्थाओं के पास है। इन ट्रस्टों में टाटा ग्रुप के कई वरिष्ठ अधिकारी और रतन टाटा के परिवार के सदस्य जुड़े हुए हैं।

फिलहाल, RNT एसोसिएट्स (RNT Associates) के बोर्ड में शिरीन जेजीभॉय, डिआना जेजीभॉय, जमशेद पोंचा और सिद्धार्थ शर्मा जैसे सदस्य शामिल हैं। मेहली मिस्त्री मार्च 2023 में इस बोर्ड में शामिल हुए थे, लेकिन अब उन्होंने भी पद छोड़ दिया है।

मेहली मिस्त्री और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद

दरअसल, मेहली मिस्त्री और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद पिछले साल सामने आए थे। नवंबर 2025 में उन्हें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (Sir Dorabji Tata Trust) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) समेत प्रमुख टाटा ट्रस्ट्स से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने चुनौती दी।

दिलचस्प बात यह है कि मेहली मिस्त्री ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य टाटा ट्रस्ट्स में दोबारा वापस जाना नहीं है। उनका कहना है कि वह केवल उन घटनाओं और फैसलों को सार्वजनिक करना चाहते हैं, जिन्हें वह गलत मानते हैं। उनका दावा है कि कुछ मुद्दों को उजागर करने के कारण ही उन्हें ट्रस्ट्स से हटाया गया।

टाटा ट्रस्ट्स की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि यही संस्थाएं टाटा संस (Tata Sons) की लगभग 66% हिस्सेदारी रखती हैं, यानी पूरे टाटा समूह का कंट्रोल काफी हद तक इन्हीं ट्रस्ट्स के पास है। ऐसे में किसी वरिष्ठ सदस्य का ट्रस्ट्स से हटना और फिर फैमिली ऑफिस से भी इस्तीफा देना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

रतन टाटा के साथ मेहली मिस्त्री का संबंध कई दशकों पुराना था। उन्हें रतन टाटा के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों में गिना जाता था। रतन टाटा के कई निजी निवेश और रणनीतिक फैसलों में उनकी अहम भूमिका बताई जाती रही है। यही वजह है कि उनके लगातार अलग होने को कॉरपोरेट जगत में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, अभी तक टाटा ग्रुप की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। लेकिन यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि रतन टाटा के निधन के बाद टाटा समूह और उससे जुड़ी संस्थाओं में नेतृत्व और प्रबंधन के स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलाव तेजी से हो रहे हैं। आने वाले समय में इस मामले पर कानूनी और कॉरपोरेट दोनों स्तर पर और भी नए घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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