Zepto के अनलिस्टेड शेयरों में 30% की बड़ी गिरावट, IPO से पहले ₹42 रह गया भाव
मुख्य बातें
- अनलिस्टेड मार्केट में जेप्टो का शेयर अप्रैल की शुरुआत में करीब 58 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जो अब घटकर लगभग 42 रुपये रह गया है
- दिसंबर 2025 में बने 68 रुपये के हाई से यह शेयर करीब 40 फीसदी नीचे आ चुका है

क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो (Zepto) के अनलिस्टेड शेयरों में पिछले दो महीनों के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली है। अप्रैल की शुरुआत से कंपनी के शेयर करीब 30 प्रतिशत टूट चुके हैं, जबकि इसी दौरान कंपनी को अपने प्रस्तावित आईपीओ (IPO) के लिए सेबी (SEBI) की मंजूरी भी मिल चुकी है। लिस्टिंग के बाद जेप्टो भारतीय शेयर बाजार में एकमात्र शुद्ध क्विक कॉमर्स कंपनी बन जाएगी।
अनलिस्टेड मार्केट में जेप्टो का शेयर अप्रैल की शुरुआत में करीब 58 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जो अब घटकर लगभग 42 रुपये रह गया है। दिसंबर 2025 में बने 68 रुपये के हाई से यह शेयर करीब 40 फीसदी नीचे आ चुका है।
IPO से 9,300 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है Zepto
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक Zepto अपने आईपीओ के जरिए 800 मिलियन डॉलर से 1 बिलियन डॉलर (करीब 7,500 करोड़ से 9,300 करोड़ रुपये) तक जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी अगले 60 से 90 दिनों के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती है।
डेली ऑर्डर डिलीवर 25 लाख से अधिक
कंपनी के कारोबार में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। सूत्रों के अनुसार Zepto पहले रोजाना 15 से 17 लाख ऑर्डर डिलीवर कर रही थी, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 25 लाख से अधिक हो गई है। कंपनी देशभर में अपने डार्क स्टोर नेटवर्क का भी विस्तार कर रही है और क्विक डिलीवरी सेगमेंट में मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है।
निवेशकों की चिंता, मुनाफा कब आएगा?
विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक फिलहाल जेप्टो की तेजी से बढ़ती वैल्यूएशन और लगातार हो रहे घाटे पर नजर बनाए हुए हैं। रिसर्च एनालिस्ट का मानना है कि निवेशकों को कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) का इंतजार करना चाहिए। केवल IPO की खबरों के आधार पर निवेश का फैसला लेना सही नहीं होगा। कंपनी की इनकम, घाटा, कैश फ्लो और भविष्य की रणनीति को समझने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकालना चाहिए।
क्यों दबाव में है अनलिस्टेड बाजार?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसके अलावा हाल के महीनों में बड़े मेनबोर्ड IPO की कमी से भी अनलिस्टेड बाजार में कारोबार प्रभावित हुआ है। हालांकि जेप्टो, NSE और SBI फंड्स मैनेजमेंट जैसी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी अब भी बनी हुई है, क्योंकि इनकी संभावित लिस्टिंग पर बाजार की नजर टिकी हुई है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


