क्या शेयर बाजार निवेशकों को मिलेगी राहत? LTCG टैक्स पर आया सरकार का बड़ा बयान
मुख्य बातें
- वित्त मंत्रालय ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि फिलहाल इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स हटाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है
- FY24 और FY25 के दौरान सरकार ने LTCG टैक्स से करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जो इस टैक्स की अहमियत को भी दर्शाता है

अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं और यह उम्मीद कर रहे थे कि सरकार जल्द ही लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स खत्म कर सकती है, तो आपके लिए अहम खबर है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स हटाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त मंत्रालय ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी है। इससे उन अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार शेयर बाजार में निवेश को बढ़ावा देने के लिए LTCG टैक्स खत्म कर सकती है। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।
वित्त राज्य मंत्री ने किया साफ
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में कहा कि वर्तमान समय में इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स समाप्त करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि सरकार हर साल बजट प्रक्रिया और जरूरत पड़ने पर कानूनों में संशोधन के दौरान टैक्स से जुड़े नियमों की समीक्षा करती रहती है, यानी भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बदलाव संभव हो सकते हैं, लेकिन अभी ऐसी कोई योजना नहीं है।
क्या है LTCG टैक्स?
दरअसल, LTCG टैक्स वह कर है, जो किसी निवेशक को शेयर या इक्विटी आधारित निवेश को तय अवधि तक रखने के बाद बेचने पर होने वाले मुनाफे पर देना पड़ता है। सरकार का मानना है कि यह टैक्स व्यवस्था कर संग्रह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। यही वजह है कि इसे हटाने का फैसला फिलहाल एजेंडे में नहीं है।
LTCG टैक्स के जरिए रेवेन्यू
सरकार द्वारा शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान इक्विटी निवेश से मिलने वाले LTCG टैक्स के जरिए लगभग 2.01 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया गया। खास बात यह है कि इस अवधि में टैक्स कलेक्शन में करीब 79% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आकलन वर्ष (AY) 2025-26 में सरकार ने 1.29 लाख करोड़ रुपये का LTCG टैक्स जुटाया, जबकि AY 2024-25 में यह आंकड़ा 72,249 करोड़ रुपये था। इससे साफ है कि शेयर बाजार में निवेश और मुनाफे के साथ-साथ सरकार का टैक्स कलेक्शन भी तेजी से बढ़ा है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि लिस्टेड इक्विटी निवेश पर 12.5% LTCG टैक्स की दर घरेलू (Retail) निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) दोनों के लिए समान है, यानी टैक्स के मामले में दोनों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया गया है।
हालांकि, सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड (Government Securities या G-Secs) में निवेश को लेकर एक बड़ा बदलाव जरूर किया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू नए नियमों के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले FPIs को ब्याज आय और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) दोनों पर आयकर से छूट दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य भारत के टैक्स सिस्टम को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना और पेंशन फंड, इंश्योरेंस कंपनियों तथा सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे बड़े विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना है।
एक्सपर्ट का मानना है कि LTCG टैक्स को लेकर समय-समय पर चर्चा जरूर होती है, लेकिन सरकार के लिए यह राजस्व का एक बड़ा स्रोत बन चुका है। ऐसे में निकट भविष्य में इसे पूरी तरह खत्म किए जाने की संभावना कम दिखाई देती है। हालांकि, हर बजट में टैक्स नियमों की समीक्षा होती है, इसलिए निवेशकों की नजर आने वाले बजट और सरकार की भविष्य की टैक्स नीति पर बनी रहेगी।
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो फिलहाल LTCG टैक्स के मौजूदा नियमों के अनुसार ही अपनी निवेश रणनीति बनाना बेहतर होगा। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अभी इस टैक्स को हटाने की कोई योजना नहीं है, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में नीतियों की समीक्षा की जाती रहेगी।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
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ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
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