रसोई गैस को लेकर बड़ा बदलाव! LPG कनेक्शन को लेकर सरकार ने बनाया ये नया नियम

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • सरकार देश के उन इलाकों में LPG सिलेंडर की जगह PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है, जहां पाइपलाइन नेटवर्क है
  • पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त करने और गैस कंपनियों के साथ मिलकर PNG कनेक्शन बढ़ाने को कहा है

PNG vs LPG
LPG कनेक्शन को लेकर सरकार ने बनाया नया नियम।

भारत सरकार अब घरों में रसोई गैस के लिए LPG सिलेंडर की जगह PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जिला स्तर पर प्रशासनिक सहयोग देने को कहा है, ताकि जिन इलाकों में PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां ज्यादा से ज्यादा घरों को पाइप वाली गैस से जोड़ा जा सके। इसके लिए हर जिले में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है, जो गैस वितरण कंपनियों और तेल कंपनियों के साथ मिलकर इस बदलाव को आगे बढ़ाएगा। सरकार का मानना है कि PNG अपेक्षाकृत सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक ईंधन है। इसके इस्तेमाल से LPG सिलेंडरों को लंबी दूरी तक ट्रकों से पहुंचाने की जरूरत भी कम होगी। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने 21 अगस्त को राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा कि PNG भारत के ऊर्जा बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके विस्तार से LPG वितरण से जुड़ा लॉजिस्टिक्स बोझ कम होगा और पहले से तैयार किए गए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (City Gas Distribution - CGD) इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। सरकार ने जिला प्रशासन को PNG कंपनियों और LPG वितरकों के बीच तालमेल कराने, उपभोक्ताओं की शिकायतों को दूर करने और नए कनेक्शन की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करने को कहा है।

सरकार के इस कदम के पीछे इस साल पश्चिम एशिया में पैदा हुआ संकट भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। संकट के दौरान भारत की LPG सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा था। भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में LPG आयात करता है और इसमें कतर, सऊदी अरब, UAE और कुवैत जैसे देशों से आने वाली सप्लाई महत्वपूर्ण है। इनमें से काफी सामान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से होकर आता है। आपूर्ति में किसी तरह की बाधा आने पर देश में LPG की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। उस दौरान सरकार को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG सप्लाई को प्राथमिकता देनी पड़ी थी और कुछ समय के लिए कमर्शियल तथा औद्योगिक ग्राहकों पर भी असर पड़ा था।

इसके मुकाबले घरेलू PNG सप्लाई संकट के दौरान ज्यादा मजबूत बनी रही। घरेलू PNG को देश में उत्पादित प्राकृतिक गैस से प्राथमिकता के आधार पर सप्लाई मिलने के कारण आयातित LPG और LNG की तरह इसका असर ज्यादा नहीं हुआ। इस अनुभव ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि घरेलू रसोई गैस के लिए पाइप्ड नेटवर्क का विस्तार करने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय संकट या समुद्री मार्गों में रुकावट की स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत स्थिर सप्लाई मिल सकती है।

सरकार ने 2026 के नए गैस वितरण और LPG नियंत्रण आदेशों के तहत उन इलाकों में LPG और PNG दोनों कनेक्शन रखने पर रोक का प्रावधान किया है, जहां PNG उपलब्ध है। नोटिस के बावजूद PNG कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करने वाले घरों में LPG सप्लाई बंद करने की कार्रवाई भी नियमों के तहत की जा सकती है। हालांकि, यह व्यवस्था केवल उन क्षेत्रों पर लागू होगी, जहां PNG नेटवर्क उपलब्ध है।

इस बदलाव को लागू करने के लिए हर भौगोलिक क्षेत्र में PCC (PNG Coordination Committee) बनाई जाएगी। यह समिति उन घरों और हाउसिंग सोसायटियों की पहचान करेगी, जहां PNG कनेक्शन दिया जा सकता है। लोगों को नोटिस देने, जागरूकता अभियान चलाने और कनेक्शन प्रक्रिया तेज करने का काम भी किया जाएगा। जिला प्रशासन को RWA और हाउसिंग सोसायटी से पाइपलाइन बिछाने के लिए जरूरी अनुमति दिलाने तथा LPG वितरकों और PNG कंपनियों के बीच समन्वय कराने में मदद करनी होगी।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वे अपने फूड एंड सिविल सप्लाई डिपार्टमेंट (Food and Civil Supplies Department) से जिला स्तर पर कम से कम जिला आपूर्ति अधिकारी के स्तर का एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। यह अधिकारी PCC के साथ मिलकर PNG विस्तार की निगरानी करेगा। सरकार का लक्ष्य साफ है, जहां पाइप्ड गैस उपलब्ध है, वहां धीरे-धीरे घरों को LPG सिलेंडर से PNG की ओर ले जाना और भारत की रसोई गैस व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित, सुविधाजनक और ऊर्जा संकट के प्रति मजबूत बनाना।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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