₹642 में मोदी सरकार दे रही LPG सिलेंडर, अब ग्राहकों के लिए आया बड़ा अपडेट
मुख्य बातें
- सरकार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडर बांटती है
- इसके तहत, 300 रुपये की सब्सिडी दी जाती है
- इसके बाद ग्राहकों को एलपीजी सिलेंडर 642 मिलता है

बीते 7 जून को रसोई गैस (एलपीजी) की कीमत में 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई। इस बढ़ोतरी के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर पहुंच गई है। हालांकि, मोदी सरकार की एक स्कीम के तहत करोड़ों लोगों को अब भी 642 रुपये का एलपीजी सिलेंडर मिल रहा है। आइए डिटेल जान लेते हैं।
क्या है मामला?
दरअसल, सरकार 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' (पीएमयूवाई) के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडर बांटती है। सरकार ने मई, 2022 में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडर 200 रुपये की लक्षित सब्सिडी शुरू की थी, जिसे बाद में अक्टूबर, 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया था। यह सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेज दी जाती है। इस तरह, देश की राजधानी दिल्ली में उज्ज्वला लाभार्थियों को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले एक सिलेंडर 642 रुपये में मिल रहा है।
बता दें कि सामान्य ग्राहकों के लिए देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत हाल में दो बार बढ़ोतरी के बाद 942 रुपये तक पहुंच गई है। दरअसल, पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से घरेलू रसोई गैस के दाम दूसरी बार बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को इसमें 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
आया है ये बड़ा अपडेट
इस बीच, मोदी सरकार ने सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की वार्षिक सीमा नौ से घटाकर चार कर दी है। वर्ष 2016 में शुरू हुई इस योजना के तहत पहले लाभार्थियों को साल में 14.2 किलोग्राम के 12 सिलेंडर सब्सिडी पर मिलते थे। हालांकि, पिछले साल सब्सिडी वाले सिलेंडर की संख्या घटाकर नौ कर गई थी, जिसे अब और भी घटाकर चार कर दिया गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खनूजा ने कहा कि संशोधित सीमा उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत वार्षिक गैस खपत के करीब है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लाभार्थियों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए समर्थन देना है।
उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी बिक्री पर प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की बिक्री में भी कंपनियों को लागत से कम कीमत पर बिक्री के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने तेल एवं गैस के दाम बढ़ाने की वजह बताते हुए कहा कि कुल मिलाकर पेट्रोलियम कंपनियों को 600-700 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
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