LPG संकट ने ईद के जश्न में डाला खलल, ₹250 की हुई बिरयानी, छोटे कारोबारियों पर दोहरी मार
एलपीजी सिलेंडर का संकट लाखों लोगों की रोजी-रोटी और आम आदमी के सस्ते भोजन पर भारी पड़ रहा है। छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड बिक्रेता इससे सबसे अधिक परेशान हैं। ईद के जश्न में भी खलल पड़ता नजर आ रहा है। आइए दिल्ली से लखनऊ तक के कई बाजारों की मिंट की ग्राउंड रिपोर्ट देखें क्या कहती है...

LPG Crisis: एलपीजी संकट ईद के पहले ही रमजान के महीने में इफ्तारी का स्वाद बिगाड़ रहा है। रमजान के इस पीक बिजनेस सीजन में ठेले-खोमचेवालों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यह समस्या पूरे भारत में स्ट्रीट फूड से लेकर रेस्तरां तक, हर जगह इसका असर देखा जा रहा है। कहीं बिरयानी तो कहीं समोसे, कई जगहों पर चीजों के दाम बढ़ा दिए गए हैं, तो कहीं मेन्यू से आइटम हटा लिए गए हैं।
क्यों है एलपीजी संकट
पश्चिम एशिया के तनाव और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में आई रुकावट का असर भारत की इनफॉर्मल फूड इकोनॉमी पर साफ देखा जा सकता है। लाखों लोगों की रोजी-रोटी और आम आदमी के सस्ते भोजन पर यह संकट भारी पड़ रहा है। आइए दिल्ली से लखनऊ तक के कई बाजारों की मिंट की ग्राउंड रिपोर्ट देखें क्या कहती है...
दिल्ली के जाकिर नगर का हाल
रात के 10 बजे हैं। सोमवार की रात और रमजान 2026 की 27वीं रात... दिल्ली के जाकिर नगर की संकरी गलियों में रौनक देखते ही बनती है। हर तरफ टिमटिमाती लाइटें, रंग-बिरंगी ईद की सजावट और लोगों की भीड़, लेकिन इस बार यह रौनक कुछ फीकी है। वजह? एलपीजी सिलेंडर का संकट।
'दुकान खोली है, सिलेंडर का जुगाड़ किया रिश्तेदार से'
जाकिर नगर की एक रेहड़ी पर मोहम्मद सलमान बिरयानी प्लेट कर रहे हैं। बीते कई दिनों से उनकी दुकान बंद थी। वह बताते हैं, "भई, आज दुकान खोली है। इतने दिनों बाद सिलेंडर का जुगाड़ हुआ है। रिश्तेदार से लेना पड़ा।" उनकी तरह यहां कई दुकानदारों को रमजान के बीच में ही दुकानें बंद करनी पड़ीं, जो उनका सबसे बिजी सीजन होता है।
1800 का सिलेंडर अब 4000 रुपये में मिल रहा
इस संकट की सबसे बड़ी वजह है मिडिल ईस्ट में चल रही जंग। इसका सीधा असर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर पड़ा है। पहले 1800 रुपये में मिलने वाला सिलेंडर अब 3500 से 4000 रुपये में बिक रहा है। आस-पास नॉन-वेजिटेरियन होटल चलाने वाले अकील अहमद बताते हैं, "पहले 1800 में मिलता था सिलेंडर, अब ईरान में जंग शुरू होने के बाद यह 3500 से 4000 रुपये में बिक रहा है।"
मेन्यू से गायब हुए कई आइटम, सिर्फ बिरयानी पर ही गुजारा
महंगाई की मार ऐसी पड़ी कि दुकानदारों को मेन्यू से कई आइटम हटाने पड़े। इशरार अहद, जो एक लोकल शॉप पर काम करते हैं, बताते हैं, "आज मेन्यू में कोरमा नहीं है। हो सकता है गुरुवार या शुक्रवार को ईद के करीब इसे सर्व कर पाएं।" इससे पहले उनकी दुकान पर बिरयानी और कई तरह के नॉन-वेज आइटम मिलते थे।
जाकिर नगर का फूड स्ट्रीट
रमजान की रातों में जाकिर नगर और शाहीन बाग की फूड स्ट्रीट पूरी रात गुलजार रहती है। दिनभर रोजा रखने वाले लोग इफ्तार और सहरी के वक्त यहां पहुंचते हैं। कई लोग तो सहरी भी यहीं खाते हैं। इस बाजार की तुलना अक्सर पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद से की जाती है। यहां दिल्लीभर से लोग रमजान का जायका लेने आते हैं, लेकिन इस बार LPG संकट ने यहां के कारोबार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
साकेत में बिरयानी 250 की, समोसा 15 रुपये का
दिल्ली के पॉश इलाके साकेत में भी इस महंगाई का असर साफ दिख रहा है। यहां 200 रुपये में मिलने वाली बिरयानी अब 230-250 रुपये में मिल रही है। समोसा 10 से बढ़कर 15 रुपये का हो गया। तंदूरी रोटी 6 से बढ़कर 8 रुपये हो गई।
साकेत में 'अवॉन बिरयानी' चलाने वाले शाहनवाज का कहना है, "या तो दुकान बंद करो या फिर कीमतें बढ़ाओ। जो सिलेंडर 1600 का मिलता था, वह अब 4000 रुपये में मिल रहा है। कीमतें न बढ़ाएं तो क्या करें?"
सर्वे में खुलासा: 57% रेस्तरां ने बढ़ाई कीमतें
लोकल सर्किल्स के 17 मार्च के सर्वे के मुताबिक पिछले हफ्ते रेस्तरां या ऑर्डर करने वाले 57% लोगों ने कहा कि कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर जाने वाले 54% लोगों ने पुष्टि की कि कीमतों में 25% तक का इजाफा हुआ है। कुछ रेस्तरां बिल में 15 रुपये या उससे ज्यादा 'एलपीजी रिवीजन फीस' अलग से जोड़ रहे हैं।
लखनऊ का टुंडे कबाब ने अपनाया कोयले का सहारा
कुछ जगहों पर दुकानदारों ने गैस के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। लखनऊ का मशहूर टुंडे कबाबी (अमीनाबाद) ने गैस की जगह कोयले का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। कई रेस्तरां मालिकों का कहना है कि वे गैस की खपत कम करने के लिए उन्हीं डिशेज को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनमें कम गैस लगती है। कुछ ने इलेक्ट्रिक और इंडक्शन कुकिंग का सहारा लेना शुरू कर दिया है। करोल बाग का बोहेम कैफे बार और पहाड़गंज का कश्मीर चूर चूर नान जैसे कई नामी रेस्तरां को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
ईद कब है
रमजान का महीना 29-30 दिनों का होता है और ईद-उल-फितर इस्लामी कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल की पहली तारीख को मनाई जाती है। भारत में ईद-उल-फितर 20 मार्च (शुक्रवार) या 21 मार्च (शनिवार) को मनाई जाएगी, जो एक रात पहले चांद दिखने पर निर्भर करेगा।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


