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लेंसकार्ट IPO पियूष बंसल को बना सकता है अरबपति, कैसे एक कमरे से बनी अरबों डॉलर की कंपनी

लेंसकार्ट IPO पियूष बंसल को बना सकता है अरबपति, कैसे एक कमरे से बनी अरबों डॉलर की कंपनी

संक्षेप: Lenskart IPO: दिल्ली के पास फरीदाबाद के एक छोटे से दफ्तर से उन्होंने अपने तीन साथियों के साथ लेंसकार्ट की शुरुआत की। आज यह एक अरबों डॉलर की कंपनी बन चुकी है। 41 वर्ष की उम्र में, यह भारतीय उद्यमी और टीवी शो शार्क टैंक के जज अब एक अरबपति बनने की दहलीज पर हैं।

Fri, 17 Oct 2025 10:04 AMDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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लगभग 15 साल पहले पियूष बंसल ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर लिंक्डइन पर रिश्ते बनाए और वहीं से लेंसकार्ट की नींव रखी। आज यह एक अरबों डॉलर की कंपनी बन चुकी है। 41 वर्ष की उम्र में, यह भारतीय उद्यमी और टीवी शो शार्क टैंक के जज अब एक अरबपति बनने की दहलीज पर हैं। कंपनी अगले महीने शेयर मार्केट में IPO लाने की तैयारी में है, जिसकी संभावित वैल्यू करीब 9 अरब डॉलर बताई जा रही है। इस हिसाब से बंसल की हिस्सेदारी लगभग 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है, और अगर कंपनी के शेयर लिस्टिंग के दिन 25% तक बढ़ते हैं, तो यह मूल्य 1 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।

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भारतीय स्टार्टअप्स में भरोसा लौटाया

बंसल की यह यात्रा इस बात का प्रतीक है कि भारतीय स्टार्टअप में निवेशकों का भरोसा फिर से लौट रहा है। Lenskart ने भारत में रोबोटिक उत्पादन तकनीक से चश्मे तैयार करने की प्रक्रिया को आसान और सटीक बनाया है। कंपनी ने जर्मनी से आयातित मशीनों की मदद से भारत में निर्माण तंत्र विकसित किया है। इसकी ऑनलाइन वेबसाइट से ग्राहक आसानी से घर बैठे परीक्षण और ऑर्डर कर सकते हैं।

मनीकंट्रोल की खबर के मुताबिक भारत के विशाल घरेलू बाजार में सफल होने के बाद, बंसल अब दक्षिण पूर्व एशिया के देशों इंडोनेशिया और वियतनाम में भी विस्तार कर रहे हैं, जहां चश्मे की मांग भारत जैसी ही तेजी से बढ़ रही है।

पैसा, मुनाफा और भरोसे की कहानी

बंसल का कहना है कि वे उन शुरुआती उपभोक्ता-टेक कंपनियों से अलग हैं जो घाटे में चल रही थीं। Lenskart ने मार्च 2025 को खत्म हुए वित्त वर्ष में अपना पहला सालाना मुनाफा दर्ज किया है। कंपनी का कारोबार गुरुग्राम से संचालित होता है और यह ऑनलाइन व रिटेल स्टोर्स दोनों माध्यमों से चश्मे बेचती है।

शार्क टैंक से मिली पहचान

टीवी शो शार्क टैंक इंडिया के जज के रूप में बंसल ने देशभर में लोकप्रियता हासिल की है। उनके इंस्टाग्राम पर 9 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। वे कहते हैं कि कारोबार में उनकी सबसे बड़ी ताकत समय की समझ और दृढ़ता है। मजाक में वे बताते हैं कि वे और उनके सह-संस्थापक अमित चौधरी हर हफ्ते एक दिन नए विचारों पर चर्चा करते हैं और उनके अनुसार, “हमारा हिट रेट लगभग 50% है, यानि सिक्का उछालने जितना बेहतर नहीं!”

वैश्विक परिस्थितियों के बीच चुनौती

इस साल कंपनी को वैश्विक व्यापार युद्धों और भू-राजनीतिक तनावों के बीच शेयर बाजार में उतरने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भारत के कई स्टार्टअप्स की वैल्यू हाल के वर्षों में गिरी है क्योंकि निवेशक अब ज्यादा सतर्क हैं। फिर भी, बंसल के धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण ने उन्हें ऐसे निवेशकों का भरोसा दिलाया है जो तेज चमक वाले व्यवसायों के बजाय लंबे समय के विकास पर ध्यान देते हैं।

सॉफ्ट बैंक, जिसके पास कंपनी की लगभग 15% हिस्सेदारी है, ने इसे "patient capital" का उदाहरण बताया है यानी ऐसी पूंजी जो धीमे पर स्थायी लाभ पर यक़ीन रखती है। फेडिलिटी मैनेजमेंट एंड रिसर्च ने इस साल की शुरुआत में लेंसकार्ट का मूल्यांकन 6.1 अरब डॉलर पर किया था।

चीन पर निर्भरता और नया उत्पादन केंद्र

हालांकि Lenskart की लगभग एक-तिहाई खरीद अब भी चीन से होती है, जैसे फ्रेम, मोल्ड और कच्चा माल, लेकिन बंसल इसे एक प्रबंधनीय जोखिम मानते हैं। वे अब भारत में हैदराबाद में एक नया विशाल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बना रहे हैं, जो 50 एकड़ भूमि में फैला होगा और प्रतिदिन लाखों चश्मे तैयार करने में सक्षम होगा।

शुरुआती कदम और शिक्षा

मैकगिल यूनिवर्सिटी मॉन्ट्रियल से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद, बंसल ने अमेरिका के रेडमंड में माइक्रोसॉफ्ट में अपना करियर शुरू किया, लेकिन जल्द ही वे भारत लौट आए और अपना खुद का बिजनेस शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने एक स्टूडेंट हाउसिंग प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया, लेकिन आगे चलकर उन्होंने भारतीयों के विजन केयर की बड़ी कमी को पहचाना और इसी दिशा में कदम बढ़ाया।

दिल्ली के पास फरीदाबाद के एक छोटे से दफ्तर से उन्होंने अपने तीन साथियों के साथ लेंसकार्ट की शुरुआत की। आज कंपनी डिजाइन से लेकर निर्माण और डिलीवरी तक अपने पूरे सप्लाई चेन पर नियंत्रण रखती है ।

तकनीकी विस्तार और भविष्य की योजना

लेंसकार्ट फिलहाल 2,723 स्टोर्स चला रही है, जिनमें भारत, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया शामिल हैं। कंपनी की करीब 40% आमदनी भारत के बाहर से आती है। IPO से जुटाए गए फंड से वह नई स्टोर्स खोलने, AI और टेक निवेश बढ़ाने, और कुछ अधिग्रहण करने की योजना बना रही है।

कंपनी का अगला सपना स्मार्ट आईवियर है। इसके लिए 70 सदस्यीय टीम काम कर रही है जो चश्मों में UPI भुगतान, कैमरा, हेडफ़ोन, और AI फीचर्स जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। बंसल कहते हैं, “सब कुछ झोंक देना आसान है, लेकिन असली फर्क समय के सही इस्तेमाल से पड़ता है।”

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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