हर महीने 7 तारीख से पहले देनी होगी कर्मचारियों को सैलरी, 2 दिन में फुल एंड फाइनल, लेबर कोड के नए नियम
मुख्य बातें
- Labour Code Rules:अगर आपकी सैलरी हर महीने लेट आती है या नौकरी छोड़ने के बाद फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है
- अब आपके लिए खुशखबरी है
- नए लेबर कोड के मुताबिक हर महीने की 7 तारीख से पहले कर्मचारियों को सैलरी देनी होगी

Labour Code Rules:अगर आपकी सैलरी हर महीने लेट आती है या नौकरी छोड़ने के बाद फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। अब आपके लिए खुशखबरी है। नए लेबर कोड के मुताबिक हर महीने की 7 तारीख से पहले कर्मचारियों को सैलरी देनी होगी। साथ ही 2 दिन में फुल एंड फाइनल देना होगा। ये नियम सभी कर्मचारियों पर लागू होगा। नए लेबर कोड (कोड ऑन वेजेज, 2019) में कर्मचारियों के लिए सैलरी पेमेंट को लेकर साफ नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के मुताबिक कंपनियों को तय समय सीमा के अंदर कर्मचारियों का पेमेंट करना होगा।
हर महीने की 7 तारीख तक देनी होगी सैलरी
1. नए नियमों के मुताबिक अगर किसी कर्मचारी को हर महीने सैलरी मिलती है तो कंपनी को अगले महीने की 7 तारीख तक सैलरी देनी होगी।
2. रोजाना मजदूरी करने वाले कर्मचारियों को काम खत्म होने के बाद उसी दिन पेमेंट करना होगा।
3.वीकली सैलरी पाने वालों लोगों उनके वीकली ऑफ से पहले सैलरी देनी होगी।
5 पखवाड़े यानी हर 15 दिनों के आधार पर वेतन पाने वालों को 2 दिन के अंदर पेमेंट करना होगा।
सिर्फ 2 दिनों में देना होगा फुल एंड फाइनल पेमेंट?
सबसे बड़ा बदलाव उन कर्मचारियों के लिए है जो नौकरी छोड़ देते हैं या जिन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। ऐसे मामलों में कंपनी को 2 वर्किंग दिनों के अंदर कर्मचारी का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना होगा। पहले कई कर्मचारियों को अपने बकाया पैसे के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। इस नए कानून की एक खास बात यह भी है कि अब यह नियम सिर्फ कम सैलरी पाने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। पहले यह नियम एक तय सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए था लेकिन अब यह हर कर्मचारी के लिए यह नियम लागू होगा।
बकाया सैलरी के लिए 3 साल तक कर सकते हैं क्लेम
नए लेबर कोड में कर्मचारियों को राहत देने के लिए एक और बड़ा बदलाव किया गया है। अब बकाया वेतन का क्लेम करने के लिए तीन साल तक का समय मिलेगा। पहले अलग-अलग कानूनों में यह समय छह महीने से दो साल तक था। कंपनियों को सैलरी देने से पहले कर्मचारियों को फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक वेज स्लिप देना भी जरूरी होगा।
सैलरी नहीं मिलने पर कर्मचारी कहां करें शिकायत?
अगर कोई कंपनी सैलरी देने में देरी करती है या बिना अनुमति वेतन से कटौती करती है, तो कर्मचारी इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर से शिकायत कर सकता है। यह अधिकारी पहले दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने की कोशिश करेगा। अगर मामला नहीं सुलझता, तो कर्मचारी या अधिकारी इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में दावा कर सकते हैं। यदि संबंधित प्राधिकरण किसी कर्मचारी के पक्ष में फैसला देता है और कंपनी पेमेंट नहीं करती, तो जिला प्रशासन बकाया अमाउंट की वसूली कर कर्मचारी को दिला सकता है।


