ITR भरने वाले 31 जुलाई से पहले कर लें ये काम…वरना अटक जाएगा रिफंड
मुख्य बातें
- अगर आपने अपना ITR (Income Tax Return) फाइल कर दिया है, तो सिर्फ रिटर्न भरना ही काफी नहीं है
- इसे 30 दिनों के भीतर e-Verify करना अनिवार्य है, नहीं तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को इनवेलिड मान सकता है
- आइए जानते हैं कि ITR को आसानी से ऑनलाइन कैसे वेरिफाई किया जा सकता है?

अगर आपने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर दिया है और अब निश्चिंत बैठे हैं, तो एक बार फिर जांच लें कि आपने उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) किया है या नहीं। दरअसल, केवल ITR फाइल करना ही पर्याप्त नहीं होता। जब तक उसका सत्यापन (Verification) नहीं किया जाता, तब तक आयकर विभाग आपके रिटर्न को पूरा नहीं मानता। ऐसे में अगर आपने रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के अंदर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया, तो आपका ITR अमान्य (Invalid) माना जा सकता है। इसका मतलब है कि आपका रिटर्न प्रॉसेस नहीं होगा और टैक्स रिफंड भी अटक सकता है।
वेरिफिकेशन को पहले मिलते थे 120 दिन
31 जुलाई को ITR फाइल करने की आखिरी तारीख नजदीक है। ऐसे में जिन लोगों ने रिटर्न भर दिया है, लेकिन अभी तक उसका सत्यापन नहीं किया है, उन्हें जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए। पहले ITR वेरिफिकेशन के लिए 120 दिनों का समय मिलता था, लेकिन 1 अगस्त 2022 से यह समय घटाकर 30 दिन कर दिया गया है।
घर बैठे मिनटों में करें ई-वेरिफिकेशन
सबसे अच्छी बात यह है कि अब ITR का ई-वेरिफिकेशन घर बैठे कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है। इसके लिए आयकर विभाग ने कई ऑनलाइन विकल्प दिए हैं। पहला और सबसे आसान तरीका आधार OTP है। अगर आपका आधार मोबाइल नंबर से लिंक है, तो OTP के जरिए तुरंत वेरिफिकेशन किया जा सकता है।
दूसरा तरीका नेट बैंकिंग है। अगर आपका बैंक इस सुविधा को सपोर्ट करता है, तो नेट बैंकिंग में लॉगिन करके सीधे ITR वेरिफाई कर सकते हैं। तीसरा विकल्प बैंक अकाउंट EVC (Electronic Verification Code) है, जिसमें पहले से सत्यापित बैंक खाते के जरिए EVC जनरेट किया जाता है।
चौथा तरीका डीमैट अकाउंट EVC है। जिन निवेशकों का डीमैट अकाउंट आयकर पोर्टल पर प्री-वैलिडेटेड है, वे इस माध्यम से भी अपना ITR वेरिफाई कर सकते हैं। 5वां विकल्प डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से कंपनियां, प्रोफेशनल्स और कुछ खास कैटेगिरी के करदाता करते हैं।
ई-वेरिफिकेशन के आसान तरीके
| ई-वेरिफिकेशन का तरीका | कैसे काम करता है? | कौन उपयोग कर सकता है? | मुख्य फायदा |
|---|---|---|---|
| आधार OTP | आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर OTP भेजा जाता है, जिसे आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर दर्ज करना होता है। | जिन करदाताओं का आधार वैध मोबाइल नंबर से लिंक है। | सबसे तेज, आसान और सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका। |
| बैंक अकाउंट EVC | पहले से सत्यापित (Pre-validated) बैंक खाते के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) जनरेट किया जाता है। | जिन करदाताओं ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपना बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट किया है। | बैंक आधारित सुरक्षित सत्यापन का आसान विकल्प। |
| डीमैट अकाउंट EVC | ई-फाइलिंग पोर्टल से लिंक किए गए प्री-वैलिडेटेड डीमैट अकाउंट के जरिए EVC जनरेट होता है। | जिन निवेशकों का डीमैट अकाउंट पहले से सत्यापित है। | शेयर बाजार में निवेश करने वाले करदाताओं के लिए सुविधाजनक। |
| नेट बैंकिंग | अधिकृत बैंक की नेट बैंकिंग में लॉगिन करके सीधे आयकर रिटर्न का सत्यापन किया जा सकता है। | अधिकृत बैंकों के ग्राहक। | अलग से OTP या EVC जनरेट करने की जरूरत नहीं पड़ती। |
| डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) | रजिस्टर्ड DSC के जरिए रिटर्न को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रमाणित (Authenticate) किया जाता है। | व्यवसाय, प्रोफेशनल और DSC का उपयोग करने वाले करदाता। | सबसे सुरक्षित तरीका, कुछ मामलों में अनिवार्य भी। |
ऑफलाइन विकल्प भी उपलब्ध
अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन ई-वेरिफिकेशन नहीं कर सकता, तो उसके पास ऑफलाइन विकल्प भी उपलब्ध है। इसके लिए ITR-V फॉर्म डाउनलोड कर उसका प्रिंट निकालना होगा, हस्ताक्षर करने होंगे और सेंट्रल प्रसेसिंग सेंटर (CPC), बेंगलुरु को 30 दिनों के भीतर डाक से भेजना होगा।
ध्यान रखें कि ई-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आयकर विभाग आपके रिटर्न की प्रॉसेसिंग शुरू करता है। सफल वेरिफिकेशन के बाद आपको स्क्रीन पर कन्फर्मेशन मैसेज और एक ट्रांजैक्शन ID मिलती है। साथ ही आपके रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भी इसकी पुष्टि भेजी जाती है।
अगर आप चाहते हैं कि आपका ITR बिना किसी परेशानी के प्रॉसेस हो और टैक्स रिफंड समय पर आपके खाते में आए, तो रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें। यह एक छोटा-सा लेकिन बेहद जरूरी कदम है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।


