आखिर क्यों जरूरी ITR में सभी बैंक अकाउंट के बारे में बताना? वरना आ जाएगा इनकम टैक्स का नोटिस

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मुख्य बातें

  • अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ अपनी कमाई और टैक्स की जानकारी देना ही काफी नहीं है
  • आपको अपने सभी एक्टिव बैंक अकाउंट की जानकारी भी आईटीआर में देनी होगी
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अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ अपनी कमाई और टैक्स की जानकारी देना ही काफी नहीं है। आपको अपने सभी एक्टिव बैंक अकाउंट की जानकारी भी आईटीआर में देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर आगे चलकर परेशानी हो सकती है। कई बार क्या होता है कि टैक्सपेयर्स अपने करेंट अकाउंट की जानकारी दे देते हैं लेकिन सेविंग अकाउंट को देना भूल जाते हैं। या किसी टैक्सपेयर्स के पास 5-6 सेविंग या करेंट अकाउंट है, जो वो सिर्फ एक अकाउंट की जानकारी आईटीआर में दे देते हैं, जिसे वह सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। अब ऐसा नहीं करना है क्योंकि ऐसा करने पर आप फंस सकते हैं और इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

सभी बैंक अकाउंट की देनी होगी जानकारी

इनकम टैक्स विभाग के नियमों के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर के दौरान आपके जितने भी एक्टिव सेविंग, करंट या ओवरड्राफ्ट बैंक अकाउंट रहे हैं, उनकी जानकारी आईटीआर में देना जरूरी है। हालांकि, जो बैंक अकाउंट लंबे समय से बंद पड़े हैं या डॉर्मेंट हो चुके हैं, उन्हें बताना जरूरी नहीं है।

सभी आईटी फॉर्म में बताने होंगे बैंक अकाउंट

यह नियम लगभग सभी आईटीआर फॉर्म पर लागू होता है। चाहे आप आईटीआर-1, आईटीआर-2, आईटीआर-3, आईटीआर-4, आईटीआर-5, आईटीआर-6 या आईटीआर-7 भर रहे हों, बैंक अकाउंट की जानकारी देना जरूरी है। अगर आप आईटीआर-1 फॉर्म फाइल कर रहे हैं तो आपको यह जानकारी पार्ट ई सेक्शन में भरनी होगी।

बैंक अकाउंट के साथ यह जानकरी भी देनी होगी

आईटीआर भरते समय आपको हर एक्टिव बैंक अकाउंट का बैंक का नाम, अकाउंट नंबर, आईएफएससी, कोड और अकाउंट का टाइप देना होगा। इसके अलावा आपको कम से कम एक ऐसा बैंक अकाउंट भी चुनना होगा, जिसमें इनकम टैक्स विभाग आपकी टैक्स रिफंड की रकम भेज सके। इसलिए जिस अकाउंट का आप नियमित इस्तेमाल करते हैं, उसे रिफंड के लिए चुनना बेहतर रहेगा। उसे जोड़ना होगा। ताकि, टैक्स रिफंड आपके बैंक अकाउंट में आ सके।

फॉरेन बैंक अकाउंट की भी देनी होगी जानकारी

अगर कोई एनआरआई यानी नॉन रेजिडेंट इंडियन भारत में बैंक अकाउंट नहीं रखता है, तो वह रिफंड के लिए अपने विदेशी बैंक अकाउंट की जानकारी भी दे सकता है। वहीं, भारत में रहने वाले टैक्सपेयर्स को यह भी बताना होगा कि क्या उनके पास विदेश में कोई एसेट्स है, किसी विदेशी बैंक खाते पर साइन करने का अधिकार है या फिर विदेश से कोई इनकम हुई है। तो आपको आईटीआर के साथ शेड्यूल एफए या नी फॉरेन एसेट्स भी भरना होगा।

Sheetal

लेखक के बारे में

Sheetal
शीतल को पत्रकारिता में 15 सालों का अनुभव है। पर्सलन फाइनेंस, गोल्ड, सिल्वर, कारोबारी सफर और स्टार्टअप की खबरें लिखती हैं। अमर उजाला से अपने करियर की शुरुआत की। अब तक इकोनॉमिक टाइम्स हिंदी, भास्कर, लाइव हिन्दुस्तान और मनीकंट्रोल हिंदी (Network18) में काम किया है। अब लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट एडिटर खबरें आप तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। और पढ़ें
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