IT स्टॉक्स ने 7.67 लाख करोड़ रुपये डूबोए, डरें या करें खरीदारी?

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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निफ्टी IT इंडेक्स इस साल 25% टूट चुका है, जो बाजार के बड़े गिरावट से दोगुना है। जानें क्या है विशेषज्ञों की राय और एचसीएल, इन्फोसिस, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज स्टॉक्स पर आगे की रणनीति।

IT स्टॉक्स ने 7.67 लाख करोड़ रुपये डूबोए, डरें या करें खरीदारी?

IT Stocks: साल 2026 में आईटी शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली है। निफ्टी में 9.4% वेटेज रखने वाले इस सेक्टर ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। कमजोर डिमांड, टैरिफ के असर और एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ोतरी जैसे कारणों से आईटी कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर बढ़ता बदलाव एक प्रमुख जोखिम के रूप में उभरा है।

कितना नुकसान हो चुका है?

Ski Capital Services के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल निफ्टी IT के शेयरों ने निवेशकों की करीब 7.67 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डूबो दी है। OFSS को छोड़ दें तो बाकी सभी निफ्टी IT स्टॉक्स 30% तक लुढ़क चुके हैं।

आईटी कंपनियों के नतीजे निराशाजनक

हाल ही में जारी बड़ी आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस, टीसीएस, विप्रो, एचसीएल टेक के नतीजे उम्मीदों के मुताबिक तो रहे, लेकिन उनकी गाइडेंस और आउटलुक ने शेयरों पर दबाव बढ़ा दिया।

इंफोसिस ने 21% मुनाफा बढ़ोतरी दिखाई, लेकिन FY27 की रेवेन्यू ग्रोथ 1.5-3.5% ही रहने का अनुमान जताया, जो बाजार की उम्मीदों से कम है। विप्रो ने Q1FY27 में सीक्वेंशियल गिरावट या स्थिर रहने का संकेत दिया। टेक महिंद्रा ने उद्योग की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने का भरोसा दिलाया।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

स्की कैपिटल के नरिंदर वाधवा का कहना है, "डील पाइपलाइन मजबूत है, लेकिन रेवेन्यू में बदलने की रफ्तार धीमी है। AI के चलते क्लाइंट बजट को बढ़ाने के बजाय रीअलोकेट कर रहे हैं। इस वजह से आईटी सेक्टर की ग्रोथ 12-15% से घटकर 6-8% रह सकती है।"

अमेट्रा पीएमएस के करण अग्रवाल ने चेताया कि 1999-2003 वाली मुश्किल साइकल दोहराई जा सकती है। तेज रिकवरी की उम्मीद न रखें, यह दौर 3-5 साल तक चल सकता है।

डरें या करें खरीदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट एक कंट्रा अवसर पेश कर रही है, लेकिन सावधानी जरूरी है। डीएसपी म्यूचुअल फंड के मुताबिक, निफ्टी 50 में आईटी का वजन ऑल-टाइम लो पर है, यानी सेक्टर अंडर-ओन्ड है। कर्ज-मुक्त स्थिति और ऊंचा रिटर्न ऑन इक्विटी मौजूदा कीमतों पर सुरक्षा प्रदान करते हैं।

नरिंदर वाधवा कहते हैं, "अब 15-20% ग्रोथ वाला दौर खत्म हो गया। सेलेक्टिव पोजिशनिंग से 10-15% रिटर्न संभव है।" करण अग्रवाल सलाह देते हैं, "लार्जकैप आईटी स्टॉक्स (इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल) मौजूदा मूल्य पर मध्यम वैल्यूएशन में हैं। 5 साल के लंबे नजरिए से कंट्रा प्ले कर सकते हैं, लेकिन नीचे और गिरावट पर भी निवेश के लिए कैश रखें।"

किन शेयरों पर दांव लगाएं?

इंफोसिस: बेहतर एक्जीक्यूशन और डील कन्वर्जन की उम्मीद

टीसीएस: सबसे स्थिर और डिफेंसिव विकल्प

टेक महिंद्रा: हाई रिस्क वाला टर्नअराउंड मामला

एचसीएल टेक: कमजोर आउटलुक, सतर्कता जरूरी

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

इनपुट: लाइव मिंट

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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