LPG सिलेंडर की किल्लत तो नहीं होने वाली? रेट, सप्लाई और बुकिंग पर क्या हैं 10 जुलाई के अपडेट?
मुख्य बातें
- LPG Price Today: ईरान-अमेरिका में फिर जंग छिड़ने का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है
- भारत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है
- ऐसे में एलपीजी की सप्लाई और कीमतों पर एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है

LPG Price Today: ईरान पर हमले हो रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी हो रही है और चिंता और चर्चा भारत के किचन में हो रही। लोग चिंतित हैं कि क्या एलपीजी सिलेंडर की किल्लत फिर से होने वाली है? क्या सिलेंडर फिर महंगा हो जाएगा? बुकिंग के नियम तो नहीं बदलेंगे? ऐसे तमाम सवालों के जवाब इस खबर में तलाशेंगे।
युद्ध विराम टूटा, होर्मुज स्ट्रेट पर असर: हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संघर्ष विराम पर दिए गए बयानों के बाद होर्मुज स्ट्रेट में नई गोलीबारी हुई है, जिससे दुनिया के सबसे व्यस्त ऑयल रूट में से एक की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं।
भारत की 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है
भारत की लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। युद्ध विराम से पहले इसमें आए संकट ने घरेलू रसोई गैस के लिए सीधा और गंभीर खतरा पैदा कर दिया था। फिर भी, भारत ने संघर्ष के चरम पर अपनी डिमांड और सप्लाई में व्यापक बदलाव करके लाखों घरों तक रसोई गैस की सप्लाई सफलतापूर्वक जारी रखा।
इस बार कैसे हैं हालात? क्या LPG की किल्ल्त होगी?
केप्लर के एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, भारत के कच्चे तेल के आयात पर इसका फिलहाल बड़ा असर नहीं दिख रहा है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों ने अपने तेल स्रोतों में विविधता ला ली है।
कच्चे तेल की सप्लाई पर सीमित असर
रितोलिया बताते हैं कि हाल की ताजा घटनाओं से पहले भी होर्मुज से होकर कच्चे तेल का प्रवाह पूरी तरह से बहाल नहीं हुआ था, लेकिन भारत के लिए पिछले 100 दिनों में स्थिति लगभग सामान्य रही है। भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी डायवर्सिफायड इंपोर्ट पोर्टफोलियो के जरिए सप्लाई को सफलतापूर्वक बनाए रखा है।
रूस आज भी भारत के कच्चे तेल आयात में बड़ी हिस्सेदारी रखता है, वहीं सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से वैकल्पिक रास्तों के जरिए मिलने वाली सप्लाई भी सुरक्षा प्रदान करती है। इसके अलावा, पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कच्चे तेल ने भी रिफाइनरी फीडस्टॉक को और अधिक विविध बनाया है।
रूस से आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
जून के महीने में भारत का कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड 4.93 मिलियन बैरल प्रति दिन पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण रूस से खरीदारी में तेजी थी। इस दौरान रूस से आयात लगभग 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा, जो भारत के कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा था। इसने रूस को भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लॉयर बना दिया है।
शिपिंग लागत और बीमा पर संभावित असर
रितोलिया कहते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने वाले जहाजों के आवागमन पर अभी कोई रोक नहीं है, लेकिन अगर क्षेत्रीय तनाव लंबा चला तो माल भाड़ा और बीमा लागत बढ़ सकती है। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी कच्चा तेल भारत के लिए फिलहाल कोई बड़ा विकल्प नहीं बनेगा, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों, अनुपालन जोखिमों और व्यावसायिक कारणों से भारतीय रिफाइनरियां ईरानी तेल की ओर नहीं रुख करेंगी।
एलपीजी सिलेंडर के रेट, सप्लाई और बुकिंग पर अपडेट
LPG Rates Today: अगर आज 10 जुलाई की बात करें तो पूरे देश में एलपीजी सिलेंडर के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इंडियन ऑयल के 10 जुलाई रेट के अनुसार दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और 19 किलो वाला कमर्शिल सिलेंडर 2930 रुपये है। कोलकाता घरेलू सिलेंडर 968 और कमर्शियल 3081.50 रुपये का है।
जयपुर में भी आज घरेलू एलपीजी सिलेंडर 945.5 और कमर्शियल सिलेंडर 2957.50 रुपये का है। जबकि, चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर 3106 रुपये और घरेलू रसोई गैस सिलेंडर 957.5 रुपये का है।
जहां तक सप्लाई की बात है तो युद्ध के समय में भी पैनिक बाइंग के चलते घरेलू सिलेंडर की किल्लत थी। सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां लगातार दावा करती रहीं कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। इस बार संकट बहुत बड़ा नहीं है। बुकिंग के नियम पहले जैसे ही हैं और सप्लाई को लेकर कोई चिंता नहीं है।
इनपुट: PTI
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


