क्या LPG सप्लाई पर संकट आने वाला है, पेट्रोल-डीजल, LNG को लेकर क्या बोली सरकार

Mar 04, 2026 06:16 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

पेट्रोल व डीजल को लेकर ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी, पर रसोई गैस (LPG) को लेकर आएगी क्योंकि, भारत अपनी जरूरत की 80 फीसदी एलपीजी खाड़ी देशों खासकर कतर से आयात करता है और वह होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। इसके साथ भारत के पास एलपीजी का कोई रणनीतिक भंडार भी नहीं है।

क्या LPG सप्लाई पर संकट आने वाला है, पेट्रोल-डीजल, LNG को लेकर क्या बोली सरकार

पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान की होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की धमकी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की कीमतों में उछाल जारी है। वहीं, भारत ने ऊर्जा सप्लाई को बरकरार रखने की चिंताएं बढ़ गई हैं। सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि भारत के पास पेट्रोलियम पदार्थों का भरपूर स्टॉक मौजूद है। भारत के 25 दिनों का पेट्रोल और डीज़ल के साथ करीब आठ सप्ताह का कच्चे तेल का स्टॉक मौजूद है। देश में करीब 25 दिन की एलपीजी और एलएनजी भी उपलब्ध है। ऐसे में इस वक्त ईंधन आपूर्ति सामान्य है।

हालांकि, सरकार का कहना है कि उसने वैकल्पिक व्यवस्था करनी शुरू कर दी है। युद्ध के लंबा खिंचने से रसोई गैस एलपीजी की आपूर्ति पर सर्वाधिक असर पड़ सकता है जिससे आम आदमी सीधे प्रभावित होगा। इस बीच, तेल कंपनियों ने पेट्रोकेमिकल यूनिट के साथ एलपीजी का उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया है। सरकार की दलील है कि देश में फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की कोई समस्या नहीं है। इस सबके बावजूद ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है।

तत्काल पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद फिलहाल आम आदमी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि की कोई संभावना नहीं है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कीमतों में वृद्धि को उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत स्थिर रहेंगी।

रसोई गैस को लेकर चिंता

पेट्रोल व डीजल को लेकर ज्यादा मुश्किल नहीं आएगी, पर रसोई गैस (LPG) को लेकर आएगी क्योंकि, भारत अपनी जरूरत की 80 फीसदी एलपीजी खाड़ी देशों खासकर कतर से आयात करता है और वह होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। इसके साथ भारत के पास एलपीजी का कोई रणनीतिक भंडार भी नहीं है। इसके साथ देश में एलएनजी का भी 60 फीसदी हिस्सा आयात होता है।

मंत्रालय का कहना है कि इस स्थिति से निपटने से लिए खाका तैयार कर लिया है। भारत ने पिछले वर्ष दिसंबर में अमेरिका के साथ एलपीजी आयात का समझौता किया था। सूत्रों का कहना है कि सरकार जहां रूस के साथ पश्चिमी अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ा रही है वहीं, अमेरिका और कनाडा से एलपीजी का आयात शुरू कर दिया है।

पूरी दुनिया पर संकट

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि आठ दस दिन के अंदर युद्ध खत्म नहीं होता है, तो भारत सहित पूरी दुनिया के लिए स्थिति खराब हो जाएगी। उनका मानना है कि उस वक्त पूरी दुनिया के लिए स्थिति को संभालना बेहद मुश्किल होगा। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के आसमान छूने के साथ आपूर्ति पर भी असर पड़ेगा।

कई देशों से है समझौता

भारत करीब चालीस देशों से कच्चा तेल और दूसरे पेट्रोलियम पदार्थ खरीदता है। सरकार का कहना है कि भारत का सिर्फ़ 40 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। बाकी साठ प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थ दूसरे रास्तों से आते हैं। इसके साथ भारत रूस से पिछले समझौते के मुताबिक कच्चा तेल खरीद रहा है।

कंट्रोल रूम स्थापित: पुरी

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने बताया कि देश में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति और स्टॉक की स्थिति पर लगातार नज़र रखने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हित सरकार के सर्वोपरि हैं। मंत्रालय को उम्मीद है कि लगातार मॉनिटरिंग के आधार पर अगर जरूरत पड़ी, तो स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए धीरे-धीरे कदम उठाए जा सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो मुश्किल

ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष आरएस शर्मा कहते हैं कि यह बेहद अप्रत्याशित स्थिति है। पश्चिम एशिया में तनाव से कीमतों में उछाल से ज्यादा मुश्किल होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से होगी क्योंकि, भारत के तेल आयात का पचास फीसदी हिस्सा यही से गुजरता है। एलएनजी आयात का दो तिहाई हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से आता है।

लड़ाई लंबी नहीं चलेगी

ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा मानते हैं कि यह लड़ाई आठ-दस दिन के अंदर अपने अंजाम तक पहुंच जाएगी। उनके मुताबिक ऐसा होता है, तो युद्ध बंद होने के बाद बढ़ी हुई कीमत फिर सामान्य हो जाएगी, पर लड़ाई लंबी चलती है, तो स्थिति को संभालना मुश्किल होगा। कीमत बढ़ेंगी और आपूर्ति पर भी असर पड़ेगा।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

होर्मुज स्ट्रेट मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़नेवाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। इसे बंद करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम होंगे, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधित होगा और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।

होर्मुज के भारत और दुनिया के लिए मायने

भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह तेल ज्यादातर होर्मुज से होकर गुजरता है। मार्गबाधित होने पर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर तुरंत असर पड़ेगा। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे महंगाई और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। साथ ही आयात बिल बढ़ने से चालू खाते का घाटा भी बढ़ता है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

और पढ़ें
जानें Hindi News, Business News, Budget 2026, बजट 2026 Live, Income Tax Live Updates की लेटेस्ट खबरें, शेयर बाजार का लेखा-जोखा, Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।,