Hindi Newsबिज़नेस न्यूज़Is the earth s gold reserves depleting China playing a role in increasing gold prices

चीन ऐसे खरीद रहा सोना, जैसे धरती से खत्म हो गया, कीमतें बढ़ाने में ड्रैगन का हाथ

  • Gold Price Review: 2,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर सोना लंबे समय तक चला है, क्योंकि चीनी सोने की ओर आकर्षित हो गए हैं। रियल एस्टेट या स्टॉक में उनका विश्वास डगमगा गया है। इस दौरान चीन के केंद्रीय बैंक ने अपने सोने के भंडार में लगातार वृद्धि की है।

Drigraj Madheshia नई दिल्ली, हिन्दुस्तान संवाददाताMon, 6 May 2024 06:57 AM
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Gold Price Review: क्या धरती से खत्म हो रहा सोना? सोने की बढ़ती कीमतों के पीछे किसका हाथ है? चीन इस तरह खरीदारी कर रहा है, जैसे कल धरती पर सोना हो ही न। अक्सर भू-राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल के समय में सोने की कीमतें असामान छूने लगती हैं। क्योंकि, इसे एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और गाजा में युद्ध के जवाब में सोने की कीमत में बढ़ोतरी हुई है।

2,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर सोना लंबे समय तक रहा है, क्योंकि चीनी सोने की ओर आकर्षित हो गए हैं। रियल एस्टेट या स्टॉक में उनका विश्वास डगमगा गया है। इस दौरान चीन के केंद्रीय बैंक ने अपने सोने के भंडार में लगातार वृद्धि की है, जबकि अमेरिकी कर्ज की हिस्सेदारी को कम किया है।

सोने के बाजारों में चीन का पहले से ही काफी दबदबा है। 2022 के अंत से सोने की वैश्विक कीमत में लगभग 50% का उछाल आया है। उच्च ब्याज दरें और मजबूत अमेरिकी डॉलर जैसे कारकों के बावजूद सोना नई ऊंचाइयों को छूना जारी रखा है, जो परंपरागत रूप से सोने को तुलनात्मक रूप से कम आकर्षक निवेश बनाते हैं।

पिछले महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने यह संकेत दिए कि वह लंबे समय तक उच्च ब्याज दरें बनाए रखेगा। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ा। सोना उछलने लगा जबकि, इस साल दुनिया की लगभग हर प्रमुख मुद्रा के मुकाबले डॉलर में वृद्धि हुई है।

चीनी खरीदारों की सनक

हालांकि, अब कीमतें लगभग 2,300 डॉलर प्रति औंस पर वापस आ गई हैं, लेकिन यह धारणा बढ़ रही है कि सोने का बाजार अब आर्थिक कारकों से नहीं बल्कि चीनी खरीदारों और निवेशकों की सनक से चल रहा है। लंदन स्थित मेटल्सडेली के सीईओ रॉस नॉर्मन ने कहा, "चीन निर्विवाद रूप से सोने की कीमत बढ़ा रहा है।"

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रियल एस्टेट सेक्टर पर संकट

चाइना गोल्ड एसोसिएशन के अनुसार, चीन में सोने की खपत पहली तिमाही में एक साल पहले की तुलना में 6% बढ़ी। यह उछाल पिछले वर्ष 9% की वृद्धि के बाद आया है। पारंपरिक निवेश कमजोर होने के कारण सोना अधिक आकर्षक हो गया। चीन का रियल एस्टेट सेक्टर पर संकट है। सोने का कारोबार करने वाले चीनी फंडों में खुब पैसा आया है। कई युवाओं ने किफायती निवेश के रूप में छोटी मात्रा में बीन्स इकट्ठा करना शुरू कर दिया।

पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की धुआंधार खरीदारी

चीन में सोने का एक अन्य प्रमुख खरीदार उसका केंद्रीय बैंक है। मार्च में, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार 17वें महीने अपने गोल्ड रिजर्व में वृद्धि की। पिछले साल बैंक ने दुनिया के किसी भी अन्य केंद्रीय बैंक की तुलना में अधिक सोना खरीदा, जिससे उसके भंडार में लगभग 50 वर्षों की तुलना में अधिक वृद्धि हुई। चीन एक दशक से अधिक समय से अपने अमेरिकी खजाने में हिस्सेदारी कम कर रहा है। मार्च तक, चीन पर लगभग 775 बिलियन डॉलर का अमेरिकी कर्ज था, जो अब 2021 के लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर से कम है।

चीन क्यों खरीद रहा इतना सोना

बीजिंग में बीओसी इंटरनेशनल के वैश्विक मुख्य अर्थशास्त्री गुआन ताओ ने कहा कि चीन ने अतीत में युआन का उपयोग करके घरेलू स्तर पर सोने की खरीदारी की, लेकिन इस बार बैंक सोना खरीदने के लिए विदेशी मुद्राओं का उपयोग कर रहा है। बैंक अमेरिकी डॉलर और अन्य मुद्राओं में अपना जोखिम कम कर रहा है। अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के तहत रूस की डॉलर होल्डिंग्स को फ्रीज करने का कदम उठाने के बाद चीन सहित कई केंद्रीय बैंकों ने सोना खरीदना शुरू कर दिया। अन्य अमेरिकी सहयोगियों ने भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। हालाँकि बीजिंग सोना खरीद रहा है। चीन के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी केवल 4.6% है। प्रतिशत के हिसाब से भारत के पास सोने का लगभग दोगुना भंडार है।

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