
IRFC ने DFCCIL को दिया ₹9821 करोड़ का लोन, विदेशी कर्ज से मुक्ति का रास्ता
भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) को 9,821 करोड़ रुपये का लोन दिया है। यह ऋण पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के लिए विश्व बैंक से लिए गए विदेशी मुद्रा कर्ज को री-फाइनेंस करने के लिए है।
भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) को 9,821 करोड़ रुपये का लोन दिया है। यह ऋण पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के लिए विश्व बैंक से लिए गए विदेशी मुद्रा कर्ज को री-फाइनेंस करने के लिए है।
समझौते का विवरण
TOI के अनुसार इस रुपये-आधारित अवधि ऋण समझौते पर DFCCIL के वित्त निदेशक राहुल कपूर और IRFC की वित्त कार्यकारी निदेशक दीपा कोटनीस ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता नई दिल्ली स्थित रेलवे बोर्ड में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ सतीश कुमार की मौजूदगी में संपन्न हुआ, जहाँ IRFC और DFCCIL के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
री-फाइनेंसिंग का महत्व
IRFC के अनुसार, यह री-फाइनेंस भारत के बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो घरेलू वित्तीय संस्थानों की बड़ी और लंबी अवधि की परियोजनाओं को स्थानीय धन से समर्थन देने की बढ़ती क्षमता को उजागर करता है। अधिकारियों ने बताया कि इससे विश्व बैंक के मौजूदा कर्ज का पूरा भुगतान हो जाएगा। विदेशी मुद्रा उधार से रुपये-आधारित वित्तपोषण में बदलाव से DFCCIL को विनिमय दर अस्थिरता के जोखिम से राहत मिलेगी और अन्य फायदे होंगे।
अधिकारियों के विचार
IRFC के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे ने कहा, "यह री-फाइनेंस भारत के बुनियादी ढाँचे के वित्तपोषण के सफर में एक ऐतिहासिक कदम है और रेलवे पारिस्थितिकी तंत्र में वित्तीय दक्षता लाने में IRFC की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।"
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)





