LPG और तेल ही नहीं, किसानों सामने भी खड़ी है बड़ी समस्या, इस वजह से बढ़ी टेंशन
Iran-US War Crisis: अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से सल्फर की सप्लाई प्रभावित हुई है। जिसकी वजह से देश के किसानों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। बता दें, तेल और एलपीजी की आपूर्ति पर पहले से ही असर पड़ रहा है।

Iran-US War Crisis: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने की वजह से सिर्फ तेल और एलपीजी ही नहीं सल्फर की समस्या खड़ी हो सकती है। सल्फर आज के समय में फर्टीलाइजर्स, बैटरी, केमिकल्स, मेटल्स और सेमीकंडक्टर्स के लिए जरूरी है। यूरिया से कंप्यूटर चिप्स तक के लिए सलफ्यूरिक एसिड काफी जरूरी है। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित होने की वजह से फैक्टरी प्रोडक्शन धीमा और फूड की कीमतें बढ़ सकती हैं। बता दें, भारत अपनी जरूरत का बढ़ा हिस्सा खाड़ी के देशों से मंगाता है। ऐसे में सल्फर की आपूर्ति प्रभावित होने की वजह से खाद की कीमतों पर असर दिखेगा। इससे किसानों के सामने नई समस्या खड़ी हो सकती है।
Modern War Institute ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की जरूरत का 50 प्रतिशत समुद्री सल्फर गुजरता है। जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से 44000 कंपनियों का कम से कम एक शिपमेंट प्रभावित हुआ है।
सल्फर क्यों है इतना जरूरी?
खाड़ी के देशों से दुनिया के एक्सपोर्ट का 45 प्रतिशत उत्पादन होता है। तेल और गैस रिफाइनिंग का सल्फर एक बायप्रोडक्ट है। ऐसे में तेल की आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर सल्फर पर पड़ता है। बता दें, दुनिया का 60 प्रतिशत सल्फर डिमांड सिर्फ फर्टीलाइजर्स के लिए आता है। बाकि बचा 40 प्रतिशत केमिकल्स, मेटल प्रोसेशिंग, बैटरी और चिप फाइब्रेकेशन के लिए होता है।
भारत के लिए क्यों है चिंता की बात
यूरिया और फॉस्फेट फर्टीलाइजर्स के लिए सल्फर बहुत जरूरी है। सल्फर की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में सरकार पर खाद की सब्सिडी बढ़ाने का दबाव होगा। वहीं, किसानों का उत्पादन खर्च बढ़ सकता है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। केमिकल और मेटल का प्रोडक्शन करने वाले लोगों की लागत बढ़ने का दबाव रहेगा।
चीन ने भी दिखाई सख्ती
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए चीन ने मई से सल्फ्यूरिक एसिड के एक्सपोर्ट को रोकने का संकेत दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह 2026 सख्ती 2026 तक लगाई जा सकती है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से चीन में सल्फर की कीमतों में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
सरकार ने सब्सिडी में किया इजाफा
इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने आने वाले खरीफ फसल के लिए न्यूट्रियन्ट आधारित सब्सिडी में करीब 12 प्रतिशत का इजाफा किया है। अगर युद्ध लम्बा खींचा तब की स्थिति में सरकार पर भी दबाव बढ़ेगा। ऐसे में सरकार के पास तब दो ही विकल्प रह जाएंगे। पहला विकल्प कीमतों को किसानों तक बढ़ा दिया जाए। या फिर सरकार के स्तर पर खर्च उठाया जाए।
लेखक के बारे में
Tarun Pratap Singhतरुण प्रताप सिंह, लाइव हिन्दुस्तान के साथ अक्टूबर 2020 से कार्यरत हैं। मौजूदा समय में बिजनेस टीम का हिस्सा हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबर पर लिखने के साथ-साथ आईपीओ पर वीडियो इंटरव्यू की भी जिम्मेदारी सम्भालते हैं। लाइव हिन्दुस्तान की वीडियो टीम के लिए 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में टीम लीड करते हुए 200 विधानसभा सीट में ग्राउंड रिपोर्टिंग, इंटरव्यू और स्पेशल स्टोरीज कर चुके हैं। श्री राम जन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा समारोह, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उत्तर प्रदेश में ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव है। साल 2025 में प्रयागराज में सम्पन्न हुए महाकुंभ में 40 दिन से अधिक दिन तक कुंभ नगरी में रहकर अनेकों वीडियो इंटरव्यू और स्पेशल स्टोरिज किए थे।
शिक्षा
बी.ए (ऑनर्स) और एम.ए की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी से पूरा किया है। भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है।
अनुभव -
HT का हिस्सा बनने से पहले स्वतंत्र तौर पर 2019 में लोकसभा चुनाव, 2019 में हरियाणा विधानसभा, 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव और 2020 में दिल्ली दंगा की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव प्राप्त है। श्री राम मंदिर भूमि पूजन (साल 2020) के दौरान भी बतौर स्वतंत्र पत्रकार अपनी सेवाएं दिए हैं।
दैनिक जागरण के एक स्पेशल कार्यक्रम के तहत वाराणसी में दो अलग-अलग साल में 100-100 बच्चों को संसदीय कार्यप्रणाली की 15 दिनों की ट्रेनिंग भी देने का अनुभव प्राप्त है।
विशेषताएं -
वीडियो रिपोर्टिंग में दक्षता हासिल है। कई इंटरव्यू और ग्राउंड ओपनियन वीडियो नेशनल लेवल पर विमर्श का केंद्र बने हैं। बिजनेस और राजनीति के अलावा क्रिकेट, धर्म और साहित्य पर लिखना-पढ़ना पसंद है।


