वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता! घटकर 2.5% पहुंची वैश्विक ग्रोथ, भारत की GDP पर भी पड़ा असर; फिर चीन से आगे कैसे?
मुख्य बातें
- वर्ल्ड बैंक ने 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास दर का अनुमान घटाकर 2.5% कर दिया है
- रिपोर्ट के मुताबिक ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव से ऊर्जा कीमतों में उछाल और अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है
- भारत की GDP ग्रोथ 7.7% से घटकर 6.6% रहने का अनुमान है

वॉशिंगटन से आई विश्व बैंक (World Bank) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल दुनिया भर की आर्थिक रफ्तार सुस्त पड़ने वाली है। ईरान युद्ध के कारण उपजे आर्थिक संकट, ऊर्जा (तेल और गैस) की बढ़ती कीमतों और चारों तरफ फैली अनिश्चितता की वजह से इस साल वैश्विक आर्थिक विकास दर (Global Growth Rate) घटकर महज 2.5% रह जाएगी। कोरोना महामारी के 6 साल बाद यह दुनिया भर के व्यापार और अर्थव्यवस्था का सबसे कमजोर प्रदर्शन होगा। 189 देशों की इस गरीबी-उन्मूलन संस्था ने दुनिया के लगभग दो-तिहाई देशों की विकास दर के अनुमान में कटौती की है, जिससे विकासशील देशों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
अमेरिका पर असर कम, लेकिन आम जनता परेशान
दिलचस्प बात यह है कि इस युद्ध की शुरुआत करने वाले अमेरिका की आर्थिक विकास दर के अनुमान में विश्व बैंक ने कोई कटौती नहीं की है। बैंक का अनुमान है कि दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस साल 2.2% की दर से बढ़ेगी, जो पिछले अनुमानों के बराबर ही है। अमेरिका एक बड़ा ऊर्जा उत्पादक (Energy Producer) देश है, इसलिए तेल और गैस का आयात करने वाले देशों की तुलना में वह इस संकट को झेलने में ज्यादा सक्षम है। इसके अलावा, वहां बड़े पैमाने पर टैक्स कटौती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रहे भारी निवेश का फायदा भी मिल रहा है। हालांकि, ईंधन (पेट्रोल-डीजल) और अन्य चीजों की बढ़ती कीमतों से वहां के आम नागरिक अभी भी परेशान हैं।
भारत और चीन सहित अन्य देशों पर क्या होगा असर?
इस युद्ध की सबसे बड़ी मार विकासशील और उभरते बाजारों वाले देशों पर पड़ रही है। विश्व बैंक ने इन देशों की विकास दर के अनुमान को 0.4% घटाकर महामारी के बाद के सबसे निचले स्तर यानी 3.6% पर ला दिया है। युद्ध के कारण ऊर्जा की सप्लाई रुकने और कीमतों में भारी उछाल आने से इन देशों का आर्थिक मनोबल टूटा है।
चीन:- दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की विकास दर इस साल गिरकर 4.2% रहने का अनुमान है, जो साल 2025 में 5% थी।
भारत:- इन तमाम मुश्किलों के बावजूद भारत एक बार फिर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। हालांकि, वैश्विक मंदी के असर से भारत भी अछूता नहीं है। भारत की विकास दर इस साल 6.6% रहने की उम्मीद है, जो 2025 की 7.7% की रफ्तार से काफी कम है।
यूरोप:- यूरो मुद्रा का इस्तेमाल करने वाले 21 यूरोपीय देशों की हालत सबसे ज्यादा नाजुक है, जहां इस साल विकास दर घटकर महज 0.8% रह जाने का अनुमान है।
कच्चे तेल और खाद के संकट से बढ़ेगी महंगाई
इस आर्थिक गिरावट की मुख्य वजह ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को बंद करना है, जहां से दुनिया का लगभग 5वां हिस्सा (20%) तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है। इस नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। विश्व बैंक का अनुमान है कि इस साल ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की औसत कीमत $94 प्रति बैरल तक पहुंच जाएगी, जो पिछले साल के मुकाबले 36% ज्यादा है।
तेल के साथ-साथ इस युद्ध ने खाद (Fertilizer) के व्यापार को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के रास्ते निर्यात होता है। खाद की कीमतें बढ़ने से किसान इसका इस्तेमाल कम कर सकते हैं, जिससे आने वाले समय में दुनिया भर में फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है और खाद्य संकट (Food Shortages) जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही
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