ईरान युद्ध: कभी बातचीत तो कभी बमबारी, पेट्रोल-डीजल पर पड़ रहा भारी, कहां कितना बढ़ा दाम?
मुख्य बातें
- Petrol, Diesel, Crude: ईरान ने यूएई पर ईरान ने हमला कर दिया है
- दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है
- इन तेजी से बदलते घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं

पिछले 6 महीने से मिडिल ईस्ट में तनाव चल रहा है। ईरान-अमेरिका युद्ध में कभी बातचीत कभी बमबारी लगातार दुनिया पर भारी पड़ रही है। होर्मुज बंद होने की वजह से कच्चे तेल के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम भी बढ़ रहे हैं और महंगाई डायन का मुंह और तेजी से बढ़ रहा है।
ताजा खबर यह है कि ईरान ने यूएई पर ईरान ने हमला कर दिया है। दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। इन तेजी से बदलते घटनाक्रमों के कारण कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड सुबह सात बजे के करीब 71 सेंट चढ़कर 91.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। WTI भी 77 सेंट की तेजी के साथ 85.71 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
युद्ध के दौरान भारत में पेट्रोल 7.50, डीजल 7.50 और घरेलू एलपीजी 89 रुपये महंगा हुआ
बता दें ईरान युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल 77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। एक समय यह 127 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच गया। कीमतें इतनी बढ़ीं कि पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के रेट आसमान छूने लगे। इसके उलट भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत स्थिर थी, क्योंकि चुनाव चल रहे थे।
चुनाव खत्म होते ही मई में तेल की कीमतें चार बार में 7.50-7.50 रुपये बढ़े। वहीं 7 मार्च को घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा हो गया। दिल्ली में इसकी कीमत 853 रुपये से 913 रुपये पर पहुंच गईं। 7 जून को 29 रुपये और बढ़े , दिल्ली में यह सिलेंडर 942 रुपये का हो गया। कुल मिलाकर इस साल अब तक घरेलू LPG सिलेंडर 89 रुपये महंगा हो चुका।
दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम पर युद्ध का प्रभाव
ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज डॉट कॉम के मुताबिक युद्ध से अबतक सबसे अधिक पेट्रोल की कीमत में उछाल भारत के पड़ोसी म्यांमार में 53.4 प्रतिशत दर्ज की गई है। यहां डीजल के दाम भी 63.2 प्रतिशत उछले हैं। इसके बाद यूएई का नंबर आत आता है, जहां पेट्रोल की कीमत करीब 50 प्रतिशत बढ़ी है। जबकि, डीजल में 50.8 प्रतिशत की तेजी है। इसके बाद रवांडा में 47.7 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। यहां डीजल भी 54.1 प्रतिशत महंगा हुआ है।
भारत के एक अन्य पड़ोसी देश श्रीलंका में भी इस अवधि में पेट्रोल 45.6 प्रतिशत महंगा हुआ है। इनके अलावा फिलीपींस में पेट्रोल 41.0 प्रतिशत बढ़ा है। ईरान पर हमला करने वाले अमेरिका में भी इस दौरान पेट्रोल जहां 34.1 प्रतिशत तो डीजल 43.02 प्रतिशत चढ़ा है। जबकि, इजरायल में पेट्रोल 17 और डीजल भी 17 प्रतिशत ही महंगा हुआ है।
पाकिस्तान में पेट्रोल 28.3 प्रतिशत उछला है जबकि, डीजल 41.6 प्रतिशत। नेपाल में पेट्रोल 27.4 और डीजल 40.8 प्रतिशत महंगा बिक रहा है। बंग्लादेश में पेट्रोल की कीमत अभी 20.8 और डीजल की 15 प्रतिशत ऊपर है। इन सभी देशों में युद्ध के पहले की तुलना में तेल अभी बहुत महंगा है, जबकि भारत में दाम केवल 7 से 8 प्रतिशत ही बढ़े हैं।
भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक और मुसीबत
भारतीय ऑयल रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की खरीदारी मुश्किल होती जा रही है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत पिछले दो हफ्तों में करीब 10 डॉलर बढ़ गई हैं। इसके साथ ही बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता घटने से खाड़ी और पश्चिम अफ्रीकी तेल की कीमतों पर भी भारी प्रीमियम चढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि रूसी तेल पर मिलने वाली छूट लगभग खत्म हो गई है, जबकि वेनेजुएला के तेल पर भी डिस्काउंट काफी कम हो गया है। (पूरी खबर पढ़ें)


