ईरान-अमेरिका जंग के 100 दिन, आपके पोर्टफोलियो वाले शेयर पर कितना असर?
मुख्य बातें
- ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जंग को 100 दिन पूरे हो चुके हैं
- अगर 100 दिन के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो इस दौरान BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4.5 लाख करोड़ रुपये घट गया है

ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जंग को 100 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान कई ऐसे मौके आए जब जंग समाप्त होने की उम्मीद जगी लेकिन अब भी हालात में सुधार होते नजर नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि सोमवार को भी भारतीय शेयर बाजार मे हाहाकार मचा हुआ था। अगर 100 दिन के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो इस दौरान BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4.5 लाख करोड़ रुपये घट गया है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि सिर्फ जंग की वजह से ही बाजार के हालात बिगड़े हैं। ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ट्रेड में भारी उथल-पुथल के कारण भी भारतीय इक्विटी मार्केट पर बुरा असर पड़ा है।
निफ्टी की वैल्यू में 7% से ज्यादा गिरावट
पिछले 100 दिनों के दौरान निफ्टी की वैल्यू में 7% से ज्यादा की गिरावट आई है। वहीं PSU बैंकों को सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ी है। युद्ध शुरू होने के बाद से निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में लगभग 16% की गिरावट आई है, जिससे मार्केट कैपिटलाइजेशन में 3.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की वैल्यू में 18.6% की गिरावट आई है। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा की बात करें तो 18% नीचे है। इसके अलावा, पंजाब नेशनल बैंक में 17.5% की गिरावट आई है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 17.4% नीचे गिरा है तो बैंक ऑफ इंडिया में 19.6% की गिरावट आई है। इस अवधि में ऑयल और गैस शेयरों में भारी गिरावट आई है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा- इस हफ्ते मार्केट के लिए मुश्किलें हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने और लेबनान में इजरायल की कार्रवाई के जवाब में ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल दागने से क्रूड की कीमतें बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर के पार चला गया है। अमेरिका से आए जॉब्स के आंकड़े अच्छे हैं, इसलिए फेडरल रिजर्व दरों में कटौती नहीं करेगा जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं। कुछ समय तक दरों में कोई बदलाव न होने की संभावना है।
हालांकि, ग्लोबल बेंचमार्क में टेक-सेक्टर की गिरावट से भारतीय इक्विटी के लिए कैपिटल रीएलोकेशन के जरिए एक अप्रत्याशित मौका भी मिल सकता है। डॉ. विजयकुमार ने कहा कि यह ध्यान रखना अहम है कि शुक्रवार को अमेरिका में हुई बिकवाली टेक-सेक्टर की वजह से थी। इससे AI ट्रेड से नॉन-AI ट्रेड की ओर शिफ्ट हो सकता है, जो भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है। अगर AI ट्रेड ठंडा पड़ता है और उसमें बदलाव आता है, तो इससे FPI की निकासी में भी बदलाव आ सकता है। इसलिए, इस ट्रेंड पर नजर रखें।
लेखक के बारे में
Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
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