अब बीमा होगा सस्ता! IRDAI ला रहा है बड़े बदलाव, भारी-भरकम कमीशन पर पड़ेगी मार
वित्त वर्ष 2025 में अकेले कमीशन के नाम पर बीमा कंपनियों ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये बांटे। यही वह पैसा है जो आपकी जेब से प्रीमियम के रूप में निकलता है। आरबीआई और इरडा दोनों ने इस पर चिंता जताई है। अब नियामक इस वितरण लागत को तर्कसंगत बनाने पर काम कर रहा है।

अगर आपको लगता है कि बीमा लेना महंगा हो गया है, तो यह खबर आपके काम की है। बीमा नियामक इरडा अगले 4-6 महीनों में ऐसे कई बड़े सुधार लागू करने जा रहा है, जिससे बीमा किफायती होगा और आपको पैसे का पूरा दम मिलेगा। इन बदलावों की सबसे बड़ी मार उन भारी-भरकम कमीशनों पर पड़ेगी, जो बीमा कंपनियां एजेंटों और बैंकों को देती हैं।
बीमा सुगम: एक प्लेटफॉर्म, सबके लिए
जल्द ही लॉन्च होगा बीमा सुगम - एक डिजिटल मार्केटप्लेस जहां आप अमेजॉन-फ्लिपकार्ट की तरह सभी बीमा कंपनियों की पॉलिसियां कंपेयर कर सकेंगे। कीमत, फीचर्स, क्लेम सेटलमेंट रेशियो - सब कुछ एक क्लिक पर। जब सबकुछ खुला होगा, कंपनियों को अपने दम पर प्रीमियम कम रखना होगा।
1 लाख करोड़ रुपये का सवाल
सोचिए, वित्त वर्ष 2025 में अकेले कमीशन के नाम पर बीमा कंपनियों ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये बांटे। यही वह पैसा है जो आपकी जेब से प्रीमियम के रूप में निकलता है। आरबीआई और इरडा दोनों ने इस पर चिंता जताई है। अब नियामक इस वितरण लागत को तर्कसंगत बनाने पर काम कर रहा है।
30% खर्च पर कैंची चलेगी
फिलहाल बीमा कंपनियां आपके प्रीमियम का 30% हिस्सा डिस्ट्रिब्यूशन और एडमिन के कामों पर खर्च करती हैं। इसमें 17-18% सीधे बैंकों, एनबीएफसी और एजेंटों की जेब में जाता है। इरडा अब इसे घटाने की तैयारी में है, खासकर हेल्थ इंश्योरेंस में जहां प्रीमियम तेजी से बढ़े हैं।
कम लागत, तेज प्रोसेस और ज्यादा पारदर्शिता
नियामक IRDA एक सहमति-आधारित डेटा रजिस्ट्री बना रहा है, जहां पॉलिसी और दावों का सारा डेटा सुरक्षित रहेगा। इससे अंडरराइटिंग तेज होगी, फ्रॉड पर लगाम लगेगी और पॉलिसी पोर्टेबिलिटी आसान होगी। मतलब - कम लागत, तेज प्रोसेस और ज्यादा पारदर्शिता।
अब कंपनियां नहीं छुपा पाएंगी सच
इरडा बीमा कंपनियों पर शिकंजा कस रहा है। अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स, रिटर्न और क्लेम सेटलमेंट रेशियो का खुलकर खुलासा करना होगा। जब सबकुछ सार्वजनिक होगा, तो कंपनियों के बीच बेहतर सर्विस और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग की होड़ लगेगी।
आम आदमी को क्या मिलेगा?
इन सुधारों का सीधा फायदा आपको मिलेगा। कमीशन खर्च घटेगा तो प्रीमियम स्थिर या कम हो सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तुलना से बेहतर और किफायती पॉलिसी चुन पाएंगे। पता चलेगा कि आपका पैसा कहां जा रहा है और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से क्लेम प्रोसेस तेज होगा। खासकर हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस में इन बदलावों का असर साफ दिखेगा, जहां बढ़ती लागत ने मिडल क्लास की जेब पर दबाव बढ़ा दिया था।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


