
बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश की अब 100% लिमिट, मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी
इस बिल के तहत अब इंश्योरेंस कंपनियों में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) की लिमिट को बढ़ाकर 100% कर दिया गया है। उम्मीद है कि इस बदलाव से भारत के इंश्योरेंस मार्केट में काफी विदेशी पूंजी आएगी, कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और कस्टमर सर्विस बेहतर होगी।
Insurance Amendment Bill: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक बिल को मंजूरी दी। इस बिल के तहत अब बीमा कंपनियों में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) की लिमिट को बढ़ाकर 100% कर दिया गया है। इसके साथ ही सेक्टर को मजबूत करने के लिए स्ट्रक्चरल सुधार भी किए गए हैं। उम्मीद है कि इस बदलाव से भारत के बीमा मार्केट में काफी विदेशी पूंजी आएगी, कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और कस्टमर सर्विस बेहतर होगी। अब तक बीमा सेक्टर ने एफडीआई के माध्यम से 82,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है।
क्या है मकसद
इस बिल का मकसद तीन मुख्य कानूनों - इंश्योरेंस एक्ट, LIC एक्ट और IRDAI एक्ट - में बदलाव करना है। इन कानूनों में ऐसे प्रावधान हैं जिनका मकसद कैपिटल तक पहुंच बढ़ाना, लाइसेंसिंग नियमों को आसान बनाना और पूरे सेक्टर में गवर्नेंस फ्रेमवर्क को मजबूत करना है। बता दें कि यह प्रस्ताव सबसे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में वित्त वर्ष 2025-26 का केंद्रीय बजट पेश करते समय रखा था। उन्होंने कहा था कि विदेशी निवेश से जुड़े मौजूदा नियमों और शर्तों की समीक्षा की जाएगी और उन्हें आसान बनाया जाएगा। बढ़ी हुई लिमिट उन कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी जो पूरा प्रीमियम भारत में निवेश करेंगी।
मनरेगा का बदला नाम
इसके साथ ही मोदी कैबिनेट में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी MGNREGA का नाम बदलने को भी मंजूरी दी गई है। अब भारत की प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना का नया नाम पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना है। इसके अलावा केंद्रीय कैबिनेट ने ऐतिहासिक परमाणु ऊर्जा कानून, एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025 या SHANTI (सस्टेनेबल हार्नेसिंग ऑफ एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) को मंजूरी दे दी है।
SHANTI बिल 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सूत्रों ने ET को बताया कि एटॉमिक एनर्जी बिल पर कैबिनेट का यह ऐतिहासिक फैसला है क्योंकि इसका मकसद भारत के अत्यधिक प्रतिबंधित परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना है।





