दूसरी तिमाही में इंडिगो की तेज उड़ान मगर रुपये की मजबूरी, 1 साल में 40% से अधिक उछले शेयर
Indigo Q2 Results: राजस्व बढ़ा और ईंधन पर खर्च 10% घटा, वहीं रुपये की कीमत गिरने से विदेशी मुद्रा में हुआ नुकसान (फॉरेक्स लॉस) दस गुना से अधिक बढ़ गया। इसकी वजह से कंपनी की EBITDAR (किराया घटाने से पहले की कमाई) 64% घटकर 860 करोड़ रुपये रह गई।
इंडिगो की सितंबर तिमाही (Q2FY26) में कंपनी का राजस्व पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 9% बढ़ा। यह वृद्धि यात्रियों की बढ़ती संख्या, बेहतर क्षमता उपयोग और टिकटों के अच्छे दामों (यील्ड) की वजह से संभव हुई। कंपनी ने अपनी यात्री क्षमता (ASK) में 8% की बढ़ोतरी की है, खासकर बड़े विमानों (वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट) को शामिल करके। इससे उसकी अंतरराष्ट्रीय और लंबी दूरी की उड़ानों का दायरा बढ़ा है। प्रबंधन को आने वाली दो तिमाहियों में दोहरे अंकों में विकास दर की उम्मीद है।
इंडिगो का अंतरराष्ट्रीय विस्तार सही समय पर हुआ है, क्योंकि अगले 12-18 महीनों में एयर इंडिया की बढ़ती क्षमता से प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इसका मुकाबला करने के लिए इंडिगो अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर काम करेगी। इस समय अंतरराष्ट्रीय उड़ानें कुल क्षमता का 30% हैं और अनुमान है कि FY30 तक यह 40% हो जाएंगी।
रुपये के कमजोर होने से नुकसान
जहां राजस्व बढ़ा और ईंधन पर खर्च 10% घटा, वहीं रुपये की कीमत गिरने से विदेशी मुद्रा में हुआ नुकसान (फॉरेक्स लॉस) दस गुना से अधिक बढ़ गया। इसकी वजह से कंपनी की EBITDAR (किराया घटाने से पहले की कमाई) 64% घटकर 860 करोड़ रुपये रह गई। अगर इस विदेशी मुद्रा के नुकसान को अलग रखा जाए, तो EBITDAR 44% बढ़कर 3,800 करोड़ रुपये हो जाती है। कंपनी का लगभग 80,000 करोड़ रुपये ($9 बिलियन) का विदेशी मुद्रा एक्सपोजर है, इसलिए रुपये के हर एक रुपये गिरने पर उसे लगभग 900 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।
विमान खरीदने की नई रणनीति
इंडिगो अब विमानों को किराए पर लेने (लीज मॉडल) के बजाय उन्हें खरीदने पर ध्यान दे रही है। हालांकि यह तरीका ज्यादा पूंजी खर्च करने वाला है, लेकिन लंबे समय में यह सस्ता पड़ता है। कंपनी के बेड़े में खरीदे गए या फाइनेंशियल लीज पर लिए गए विमानों की संख्या बढ़कर 76 हो गई है, जो कुल बेड़े का 24% है। पिछले साल यह संख्या 40 थी।
फाइनेंशियल लीज खत्म होने पर कंपनी विमान को उसके डिप्रिशिएटेड वैल्यू पर खरीद सकती है, जबकि ऑपरेटिंग लीज में विमान वापस करना पड़ता है। इंडिगो का लक्ष्य FY30 तक अपने 30-40% बेड़े को खरीदना या फाइनेंशियल लीज पर लेना है।
मरम्मत के व्यवसाय में कदम
इसी रणनीति के तहत, कंपनी अब विमानों की मरम्मत और रखरखाव (MRO) के क्षेत्र में भी उतर रही है। इसके लिए वह बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के साथ मिलकर एक MRO सुविधा बना रही है।
शेयर और भविष्य की संभावनाएं
प्रतिस्पर्धी किराए और ईंधन की गिरती कीमतों के कारण बाजार में हिस्सेदारी बढ़ने से इंडिगो के शेयर में पिछले एक साल में 40% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, रुपये की कमजोरी कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आगे शेयर की कीमत मुख्य रूप से यात्रा की मांग और ईंधन की कीमतों पर निर्भर करेगी।





