
इंडिगो संकट: इस ‘स्पेशल टीम’ ने पहले ही कर दिया था DGCA को आगाह, फिर कैसे हुई चूक
Indigo Crisis: इंडिगो संकट की वजट से देश भर के अलग-अलग एयरपोर्ट्स बड़ी संख्या में यात्री फंसे रहे। संकट को गहराता देख से सरकार ने भी अपने आदेश को वापस ले लिया। ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर की स्टैंडिंग कमिटी ने अपनी अगस्त की रिपोर्ट में पहले ही इन परिस्थितियों के लिए आगाह कर दिया था।
Indigo Crisis: इंडिगो संकट की वजट से देश भर के अलग-अलग एयरपोर्ट्स बड़ी संख्या में यात्री फंसे रहे। संकट को गहराता देख से सरकार ने भी अपने आदेश को वापस ले लिया। ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर की स्टैंडिंग कमिटी ने अपनी अगस्त की रिपोर्ट में पहले ही इन परिस्थितियों के लिए आगाह कर दिया था। कमिटी की तरफ से दी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि एविएशन सेक्टर “क्रिटिकल इंफ्लेशन प्वांइट” पर पहुंच गया है। एयरक्राफ्ट में तेजी के साथ ग्रोथ देखने को मिला है। लेकिन पायलट्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की संख्या में उस हिसाब से इजाफा नहीं हुआ है। स्टैडिंग कमिटी की रिपोर्ट में फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन में छूट ना देने की सलाह दी डीजीसीए को दी गई थी।
‘खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है एविएशन सेक्टर’
कमिटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि पायलट की कमी, एटीसी ओवरलोड, रेगलुटेरी मैनपावर की कमी और तेजी से बढ़ते फ्लीट की वजह से भारत का एविशन सेक्टर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। समीति ने अपनी रिपोर्ट पायलट्स और कंट्रोलर पर बढ़ते वर्कलोड पर ध्यान दिलाया था। साथ ही आगाह किया था कि इससे रनवे पर समस्या, जमीन और आसमान पर टक्कर की संभावना बढ़ जाती है।
जेडीयू नेता संजय झा की अगुवाई वाली स्टैंडिंग कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि डीजीसीए को यह देखना चाहिए की अपडेटेड एफडीटीएल के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। जिससे उनकी सुरक्षा को नजरंदाज ना किया जा सके।
डीजीसीए में कर्मचारियों की कमी
रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया था कि डीजीसीए खुद कर्मचारियों की समस्या से जूझ रहा है। 1063 पदों में से सिर्फ 553 पद ही भरे जा सके हैं। आधे से ज्यादा पद खाली हैं। जबकि पैसेंजर और फ्लीट की संख्या में तेज इजाफा हुआ है।





