महंगाई ने फिर डराया! जून में इंफ्लेशन बढ़कर 4.38%, क्या और महंगा होगा सबकुछ?
मुख्य बातें
- भारत की खुदरा महंगाई जून 2026 में बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो 17 महीने बाद RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर है
- खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ाई है
- आइए जरा विस्तार से समझते हैं कि आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा?

भारत में महंगाई एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। जून 2026 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो पिछले 17 महीनों में पहली बार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर निकल गई है। इससे पहले लंबे समय तक महंगाई RBI के तय लक्ष्य के आसपास या उससे नीचे बनी हुई थी, लेकिन अब खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के बजट पर दबाव बढ़ा दिया है। जून का यह आंकड़ा इस साल संशोधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और नए उपभोग पैटर्न लागू होने के बाद का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर भी माना जा रहा है। हालांकि, यह आंकड़ा फिलहाल अस्थायी (Provisional) है और बाद में इसमें संशोधन संभव है।
महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में तेजी रही। सब्जियां, दालें, फल, दूध और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। वहीं, पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल आया, जिसका असर पेट्रोल, डीजल और परिवहन लागत पर पड़ा। जब परिवहन महंगा होता है, तो उसका असर लगभग हर सामान की कीमत पर दिखाई देता है। इसके अलावा इस बार मानसून की अनिश्चित स्थिति को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अगर बारिश सामान्य नहीं रहती है, तो फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4% पर बनाए रखना है, जबकि उसे 2% से 6% के दायरे में रहने की अनुमति है। यह लक्ष्य अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक के लिए तय किया गया है। जून में हुई मौद्रिक नीति समीक्षा में RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखा था और अपनी न्यूट्रल पॉलिसी जारी रखी थी। केंद्रीय बैंक का मानना है कि एक तरफ महंगाई पर कंट्रोल रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक विकास की रफ्तार भी बनी रहनी चाहिए। यही कारण है कि फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।
RBI ने बढ़ाया महंगाई अनुमान
हालांकि, RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान भी बढ़ा दिया है। पहले जहां केंद्रीय बैंक ने अप्रैल में पूरे साल की औसत महंगाई 4.6% रहने का अनुमान लगाया था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। इसके पीछे लगातार बढ़ती खाद्य कीमतें, महंगा कच्चा तेल और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव जैसी प्रमुख वजहें बताई गई हैं।
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और आयातित महंगाई (Imported Inflation) भी बढ़ सकती है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले कुछ महीने काफी अहम होंगे। अगर मानसून सामान्य रहता है और खाद्य आपूर्ति बेहतर होती है, तो महंगाई में कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन, अगर बारिश कमजोर रही या पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ा, तो महंगाई पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में RBI के लिए भी आगे ब्याज दरों को लेकर फैसला लेना आसान नहीं होगा। फिलहाल, आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती महंगाई के बीच घरेलू बजट को संतुलित रखना है, क्योंकि खाने-पीने की चीजों से लेकर ईंधन तक लगभग हर जरूरी खर्च पहले के मुकाबले महंगा होता जा रहा है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
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