मिडिल क्लास को बड़ा झटका! LPG की खपत में भारी गिरावट, ईंधन खपत 6.5% गिरी; अब सरकार ने भी बदले नियम
मुख्य बातें
- मई 2026 में भारत की कुल पेट्रोलियम उत्पाद खपत 6.5% घटकर 19.93 मिलियन टन रह गई
- सबसे बड़ी गिरावट LPG की मांग में देखने को मिली, जो 20.5% कम हो गई
- वहीं, पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे निजी वाहन उपयोग में मजबूती का संकेत मिला
भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में मई 2026 के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल ईंधन खपत सालाना आधार पर 6.5% घटकर 19.93 मिलियन टन रह गई है, जबकि मई 2025 में यह 21.3 मिलियन टन थी। एक्सपर्ट का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक सप्लाई में आई दिक्कतों ने भारतीय ईंधन बाजार पर सीधा असर डाला है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की डिमांड में बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन एलपीजी (LPG), नेफ्था और बिटुमेन की मांग में भारी गिरावट ने कुल खपत को नीचे खींच दिया।
रसोई गैस की डिमांड में सबसे बड़ी गिरावट
सबसे बड़ी गिरावट रसोई गैस यानी एलपीजी की खपत में दर्ज की गई। मई 2026 में एलपीजी की मांग 20.5% घटकर 2.13 मिलियन टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 2.68 मिलियन टन थी।
सरकार ने भी बदले नियम
सरकार द्वारा डिमांड प्रबंधन के तहत गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि बढ़ाने और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 करने जैसे कदमों का भी इस गिरावट में बड़ा योगदान माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें बढ़ने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का नुकसान हो रहा है, जिससे सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है।
पेट्रोल और डीजल की डिमांड में मजबूती
दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल की डिमांड में मजबूती बनी हुई है। मई में पेट्रोल की खपत 3.4% बढ़कर 3.9 मिलियन टन पहुंच गई, जबकि डीजल की डिमांड 1.6% बढ़कर 8.7 मिलियन टन रही। यह संकेत देता है कि निजी वाहनों का उपयोग और लोगों की यात्रा गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। ऊंची कीमतों के बावजूद लोग अपनी डेली जरूरतों के लिए ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे इन दोनों प्रमुख ईंधनों की डिमांड में बढ़ोतरी दर्ज हुई।
ATF की खपत लगभग स्थिर
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमानन ईंधन की खपत लगभग स्थिर रही और मई में 7.83 लाख टन के स्तर पर बनी रही। वहीं, सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन की डिमांड में 39.4% की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा नेफ्था की खपत भी 29.4% घट गई। यह संकेत देता है कि निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों की गति कुछ क्षेत्रों में धीमी पड़ी है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से जुड़े जोखिमों को देखते हुए भारत सरकार ने घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य आयात में संभावित कमी की भरपाई करना है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए वैश्विक संकट का सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।
भारत का रिफाइंड ऑयल एक्सपोर्ट घटा
सिर्फ घरेलू खपत ही नहीं, बल्कि भारत के रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी कमी देखने को मिली। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में भारत का रिफाइंड ऑयल एक्सपोर्ट 9.37 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 3.6% कम है। बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता, ऊंची ऊर्जा कीमतें और सरकारी नियंत्रण उपायों ने भारत के ईंधन बाजार को प्रभावित किया है। आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी कि ईंधन खपत और कीमतों का रुख किस दिशा में जाता है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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