महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? LPG और तेल लाने को भारत की सबसे बड़ी कंपनी को क्यों नहीं मिला जहाज? वजह जान चौंक जाएंगे
मुख्य बातें
- भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को खाड़ी देशों से कच्चा तेल और एलपीजी लाने के लिए जहाज चार्टर करने में बड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है
- कंपनी के तीन बड़े टेंडरों में एक भी बोली नहीं आई
- आइए जरा विस्तार से इसकी वजह जानते हैं

भारत की एनर्जी सेफ्टी को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को खाड़ी देशों से कच्चा तेल और एलपीजी (LPG) लाने के लिए जहाज किराये पर लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि कंपनी द्वारा जारी किए गए तीन बड़े टेंडरों में एक भी बोली नहीं आई। इसका मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव और जहाज मालिकों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बताई जा रही हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
दरअसल, इंडियन ऑयल ने पिछले सप्ताह तीन अलग-अलग टेंडर जारी किए थे। इनमें एक वेरी लार्ज गैस कैरियर (VLGC), एक वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (VLCC) और एक सुएजमैक्स जहाज को चार्टर करने की योजना थी। इन जहाजों का उपयोग कतर, कुवैत, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से एलपीजी और कच्चा तेल भारत लाने के लिए किया जाना था। लेकिन, जहाज मालिकों ने इन टेंडरों में कोई रुचि नहीं दिखाई।
एक्सपर्ट का कहना है कि फिलहाल अधिकांश शिपिंग कंपनियां "वेट एंड वॉच" यानी इंतजार और निगरानी की रणनीति अपना रही हैं। उन्हें डर है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर से कोई सैन्य या राजनीतिक संकट पैदा होता है, तो उनके जहाजों और माल को नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि वे फिलहाल इस सेक्टर में जहाज भेजने से बच रहे हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी डिमांड में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्री रास्ते से होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। भारत जैसे देशों के लिए इसका महत्व और भी अधिक है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अगर इस मार्ग में किसी प्रकार की बाधा आती है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
इंडियन ऑयल कतर के रस लाफान, कुवैत के मीना अल अहमदी और यूएई के रुवैस बंदरगाहों से लगभग 45,000 टन एलपीजी लाने की योजना बना रही थी। इसके अलावा कंपनी सऊदी अरब और कुवैत से कच्चा तेल लाने के लिए भी बड़े जहाजों की तलाश कर रही थी। लेकिन, एक भी बोली नहीं मिलने से कंपनी की योजनाओं को झटका लगा है।
हालांकि, अभी भारत में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की उपलब्धता पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो आयात लागत बढ़ सकती है। जहाजों की कमी और बढ़े हुए जोखिम के कारण भविष्य में तेल और गैस की ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका असर ऊर्जा कंपनियों के खर्च और अंततः उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
एनर्जी मार्केट के जानकारों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में अगर खाड़ी क्षेत्र में हालात सामान्य होते हैं और जहाज मालिकों को सुरक्षा का भरोसा मिलता है, तो फिर से टेंडरों में रुचि देखने को मिल सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और मध्य पूर्व के हालात पर टिकी हुई है, क्योंकि यही तय करेगा कि वैश्विक तेल बाजार और भारत की ऊर्जा आपूर्ति आगे किस दिशा में जाएगी।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
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ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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