ग्लोबल टेंशन के बीच RBI बनेगा संकटमोचक, सरकार को रिकॉर्ड डिविडेंड देने की तैयारी
मुख्य बातें
- भारत सरकार को इस हफ्ते RBI से रिकॉर्ड करीब 3 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर मिल सकता है
- RBI बोर्ड शुक्रवार को इस डिविडेंड को मंजूरी दे सकता है
- यह रकम पिछले वित्त वर्ष के 2.7 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड भुगतान से भी ज्यादा हो सकती है
ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सरकार के लिए संकटमोचक बनने वाला है। दरअसल, RBI की ओर से इस वर्ष सरकार को अब तक का सबसे अधिक डिविडेंड दिए जाने की संभावना है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार को इस हफ्ते रिजर्व बैंक से रिकॉर्ड करीब 3 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर मिल सकता है। RBI बोर्ड शुक्रवार को इस डिविडेंड को मंजूरी दे सकता है। बता दें कि RBI ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था जो इससे पिछले वर्ष 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक था।
रिजर्व बैंक केैसे करता है कमाई?
RBI अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों, सरकारी बॉन्ड निवेश और करेंसी छपाई से होने वाली आय के जरिए यह सरप्लस कमाता है। बहरहाल, यह सरप्लस ऐसे समय में मिलने जा रहा है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने, चालू खाते के घाटे पर दबाव बनने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज होने की आशंका है। इसी दबाव के बीच RBI का यह बड़ा भुगतान सरकार के लिए राहत का काम करेगा।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
PGIM इंडिया एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख पुनीत पाल के मुताबिक बॉन्ड मार्केट पहले से ही RBI से मिलने वाले लगभग 3 ट्रिलियन रुपये के भुगतान को अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि ज्यादा डिविडेंड राजकोषीय प्रबंधन में मदद कर सकता है लेकिन इसका तब तक कोई खास असर नहीं पड़ेगा जब तक कि यह काफी ज्यादा न हो।
भारत ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए RBI, सरकारी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से 3.2 ट्रिलियन रुपये के भुगतान का बजट रखा है। इस ट्रांसफर का ज्यादातर हिस्सा आमतौर पर सेंट्रल बैंक से ही आता है और इससे वित्त को मदद मिलेगी लेकिन तेल और उर्वरक की बढ़ती कीमतों की वजह से घाटे के आंकड़े अब भी दबाव में रह सकते हैं।
इंडसइंड बैंक लिमिटेड के अर्थशास्त्री गौरव कपूर ने कहा कि पिछले कुछ साल में RBI की एसेट्स पर ज्यादा रिटर्न कमाने की क्षमता में साफ तौर पर बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में ब्याज दरों के बढ़ने से कमाई बढ़ी है और सोने की कीमतों में बढ़ोतरी से रिवैल्यूएशन से होने वाला फायदा बढ़ा है, जिससे पूंजी में भी बढ़ोतरी हुई है। हाल के साल में, यह सेंट्रल बैंक इस कीमती धातु के दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक रहा है।
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