भारत पर मंडरा रहा वैश्विक संकट का खतरा? पीयूष गोयल ने दिया बड़ा बयान
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि वैश्विक संकटों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है
- उन्होंने भारतीय कंपनियों से घरेलू उद्योगों और सप्लायर्स को प्राथमिकता देने की अपील की
- गोयल ने आत्मनिर्भर भारत और मेड-इन-इंडिया मॉडल को भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताया

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता के इस दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूती (Resilience) का लोहा मनवाया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को CII वार्षिक बिजनेस समिट 2026 में कहा कि दुनिया भर की चुनौतियों के बावजूद भारत के बुनियादी आर्थिक सिद्धांत (Fundamentals) बेहद ठोस हैं और वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
बिजनेस एज यूजुअल का समय खत्म
पीयूष गोयल ने भारतीय उद्योग जगत को एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब पुराने ढर्रे पर काम करने का समय बीत चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में की गई 'आर्थिक अनुशासन' और 'आत्मनिर्भरता' की अपील का हवाला देते हुए गोयल ने इसे एक वेक-अप कॉल (चेतावनी की घंटी) बताया। उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाने के लिए सरकार, उद्योग और नागरिकों को एक टीम की तरह काम करना होगा। उनके शब्दों में, यह सरकार बनाम उद्योग नहीं, बल्कि सरकार और उद्योग और भारत के लोग हैं।
जापान और दक्षिण कोरिया से सीखें 'स्वदेशी तालमेल'
मंत्री ने भारतीय कंपनियों को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) पर अपनी निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादकों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उन्होंने जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के औद्योगिक मॉडल का उदाहरण दिया, जहां कंपनियां एक-दूसरे का समर्थन करती हैं और अपने ही देश के कच्चे माल व सेवाओं को तरजीह देती हैं।
घरेलू नेटवर्क मजबूत करें:- उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को एक-दूसरे का हाथ थामना चाहिए। यह केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि समय की ज़रूरत है।
सामूहिक लाभ:- गोयल ने कहा कि भारतीय उद्योग को अपनी 'संकीर्ण सोच' से बाहर निकलना होगा और यह समझना होगा कि पूरे उद्योग जगत का भला होने से ही व्यक्तिगत कंपनियों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।
सरकार पर निर्भरता कम करने की अपील
पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि हर चीज के लिए सरकार के हस्तक्षेप का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्टील उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि जापान और कोरिया में वहां की इंडस्ट्री खुद तय करती है कि वे अपनी घरेलू सप्लाई चेन को कैसे मज़बूत रखेंगे। भारतीय कंपनियों को भी अपने आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को मजबूत करने की जिम्मेदारी खुद लेनी होगी।
वैश्विक चुनौतियों के बीच 'इंडिया स्पिरिट'
मंत्री ने कहा कि दुनिया तकनीकी और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, लेकिन भारत में किसी भी चुनौती से निपटने और खुद को मज़बूत करने की क्षमता है। उन्होंने इसे 'इंडिया स्पिरिट' का नाम दिया। आज जब पूरी दुनिया अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने और दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने में जुटी है, तब भारत का आत्मनिर्भर होना और घरेलू उद्योगों का मजबूत होना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की सराहना करते हुए उद्योग जगत से अपील की है कि वे विदेशी स्रोतों के बजाय घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को प्राथमिकता दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भरता ही एकमात्र रास्ता है। गोयल ने जापानी और कोरियाई कार्यशैली का उदाहरण देते हुए भारतीय कंपनियों को एक-दूसरे का समर्थन करने और अपनी आंतरिक सप्लाई चेन को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि भारत भविष्य में किसी भी वैश्विक झटके से सुरक्षित रह सके।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
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