टाटा को मिला डिफेंस का बड़ा ऑर्डर, ग्रुप की इस कंपनी से 850 घातक ड्रोन खरीदेगी भारतीय सेना
मुख्य बातें
- डिफेंस सेक्टर के इस बड़ी डील में टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने सबसे कम बोली लगाई है
- इसके अलावा, निबे डिफेंस दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही
भारतीय सेना ने अपनी मारक क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सैकड़ों वन-वे अटैक ड्रोन की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। डिफेंस सेक्टर के इस बड़ी डील में टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने सबसे कम बोली लगाई है। जानकारी के मुताबिक सेना की यह पहली बड़ी ड्रोन खरीद फास्ट ट्रैक प्रोसीजर (FTP) के तहत की जा रही है। इसके तहत, सेना को तेजी से ऑर्डर देने की सुविधा मिलती है और कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के छह महीने के भीतर सप्लाई शुरू हो जाती है।
टाटा की कंपनी को कितना ऑर्डर?
डिफेंस सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) बनकर उभरी है और भारतीय सेना की आर्टिलरी के लिए जरूरी 840 लॉइटरिंग म्यूनिशन में से 64 प्रतिशत की सप्लाई करेगी। इसके अलावा, निबे डिफेंस दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-2) रही और उम्मीद है कि वह बाकी 36 प्रतिशत ड्रोन की सप्लाई करेगी। अगर रकम के हिसाब से देखें तो टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को लगभग 1,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिलने की संभावना है जबकि निबे लिमिटेड का हिस्सा लगभग 600 करोड़ रुपये का हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय सेना ने कुछ दिन पहले ही फास्ट-ट्रैक खरीद प्रक्रिया के तहत 100 किलोमीटर से अधिक रेंज वाले लॉइटरिंग म्यूनिशन के लिए टेंडर की प्राइस बिड खोली थी।
सूत्र बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ तीन वेंडर टेक्निकल इवैल्यूएशन में पास हुए। ये थे - टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, स्काईस्ट्राइकर ड्रोन पर आधारित वायुअस्त्र प्लेटफॉर्म वाली निबे लिमिटेड और ए-विजन। अब भारतीय सेना कीमत पर बातचीत के लिए L-1 और L-2 बिडर को बुलाएगी।
सेना ने जिस ड्रोन का ऑर्डर दिया है वो आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी माने जा रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या पश्चिम एशिया का संघर्ष, हर जगह ऐसे ड्रोन ने दुश्मन के ठिकानों, तोपखानों और सैन्य संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचाया है। भारतीय सेना जिन ड्रोन को खरीद रही है, उन्हें जैमिंग और स्पूफिंग से सुरक्षित बनाया गया है। इनकी डिजाइन में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिले अनुभवों को भी शामिल किया गया है। सेना ने इन ड्रोन का कठिन परिस्थितियों में परीक्षण किया, जहां टेकऑफ से लेकर लक्ष्य पर हमला करने तक इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का माहौल तैयार किया गया था।
बता दें कि वन-वे अटैक ड्रोन के लिए कई बड़े ऑर्डर अभी प्रोसेस में हैं, जिनमें ऐसे सिस्टम्स भी शामिल हैं जो 1500 किलोमीटर से अधिक दूर के टारगेट पर हमला कर सकते हैं। सबकी नजरें इन सिस्टम्स की डिलीवरी पर होंगी क्योंकि फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया में समय-सीमा का पालन करने पर सख्ती बरती जाती है और देरी होने पर भारी जुर्माना लगता है।
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