ग्लोबल GDP में होगा भारत का दबदबा, चीन को लग सकता है बड़ा झटका

Deepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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मुख्य बातें

  • फिलहाल चीन का वैश्विक जीडीपी में लगभग 20% हिस्सा है, जो अमेरिका से भी अधिक है
  • हालांकि, भारत साल 2060 तक अपनी हिस्सेदारी बढ़ा देगा और चीन बहुत पीछे छूट जाएगा
ग्लोबल GDP में होगा भारत का दबदबा, चीन को लग सकता है बड़ा झटका

भारत आने वाले दशकों में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है। परचेजिंग पावर पैरिटी (पीपीपी) के आधार पर भारत ग्लोबल जीडीपी में हिस्सेदारी के मामले में साल 2060 तक चीन को पछाड़ देगा। यह अनुमान रिसर्च संस्थान वर्ल्ड इनइक्वलिटी लैब (WIL) से जुड़े रिसर्चर की रिपोर्ट में लगाया गया है। बता दें कि पेरिस स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स (पीएसई) में स्थित WIL वैश्विक असमानताओं के अध्ययन पर काम करता है।

क्या है रिपोर्ट में?

रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान में चीन की पीपीपी के संदर्भ में वैश्विक जीडीपी में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो अमेरिका की तुलना में लगभग एक-तिहाई अधिक है। इसमें वर्ष 2035 तक चीन की अर्थव्यवस्था के अमेरिका से लगभग दोगुनी होने का अनुमान भी जताया गया है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की जनसंख्या हिस्सेदारी तेजी से घट रही है। वर्ष 1945 में जहां यह दुनिया की जनसंख्या का लगभग 23 प्रतिशत थी, वहीं 2025 में यह घटकर करीब 17 प्रतिशत रह गई है और वर्ष 2100 तक इसके आठ प्रतिशत से भी कम रह जाने का अनुमान है।

रिपोर्ट कहती है कि इसी वजह से 21वीं सदी के दूसरे हिस्से में चीन की वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी स्थिर होने के बाद घटने का अनुमान है। लगभग वर्ष 2060 तक भारत के चीन को पीछे छोड़ देने की संभावना है। इसके मुताबिक, इस बात की संभावना बहुत कम है कि चीन कभी उस तरह का वैश्विक प्रभुत्व हासिल कर सकता है जैसा अमेरिका ने लगभग 1950 के आसपास या यूरोप ने 1900–1910 के बीच हासिल किया था। इसके चलते भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था के बहुध्रुवीय बने रहने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में भारत में असमानता चीन की तुलना में कहीं अधिक है लेकिन उत्पादकता वृद्धि अपेक्षाकृत कम है। मानव पूंजी में चीन के अधिक और बेहतर निवेश को इसका कारण बताया गया है।

वर्ष 2026 में भारत का जीडीपी 4.15 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है जबकि ब्रिटेन का जीडीपी 4.27 लाख करोड़ डॉलर और जापान का 4.38 लाख करोड़ डॉलर रह सकता है। अमेरिका 32.38 लाख करोड़ डॉलर के साथ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा, जबकि चीन 20.85 लाख करोड़ डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर रहेगा।

क्या होता है पीपीपी?

यह एक आर्थिक मापदंड है, जो बताता है कि किसी देश की मुद्रा से वहां कितनी वस्तुएं और सेवाएं खरीदी जा सकती हैं। आसान भाषा में समझें तो पीपीपी यह तुलना करता है कि अलग-अलग देशों में समान रकम से कितनी खरीदारी की जा सकती है।

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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