अप्रैल में बढ़ गई खुदरा महंगाई, 4 महीने के हाई पर आंकड़े

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मुख्य बातें

  • खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई
  • यह चार महीने का उच्चतम स्तर है
  • इस दौरान, खाद्य मुद्रास्फीति दर अप्रैल में सालाना आधार पर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई जो मार्च में 3.87 प्रतिशत थी
अप्रैल में बढ़ गई खुदरा महंगाई, 4 महीने के हाई पर आंकड़े

नए फाइनेंशियल ईयर के पहले महीना यानी अप्रैल में खुदरा महंगाई बढ़ गई थी। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह चार महीने का उच्चतम स्तर है। इससे पहले खुदरा महंगाई मार्च में 3.40 प्रतिशत के स्तर पर थी। इस दौरान खाद्य मुद्रास्फीति दर सालाना आधार पर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई।

खाद्य महंगाई में बड़ा उछाल

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 को आधार मानकर की गई गणना के आधार पर खुदरा मुद्रास्फीति दर अप्रैल में 3.48 प्रतिशत रही। वहीं, खाद्य मुद्रास्फीति दर अप्रैल में सालाना आधार पर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई जो मार्च में 3.87 प्रतिशत थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मुद्रास्फीति की दर क्रमशः 3.74 प्रतिशत और 3.16 प्रतिशत दर्ज की गई।

क्या-क्या हुआ महंगा?

अप्रैल में चांदी के आभूषण की कीमतों में तगड़ा उछाल आया। इसकी कीमतें अप्रैल में पिछले साल की तुलना में 144.3 प्रतिशत बढ़ गईं। सोने, हीरे और प्लैटिनम के आभूषणों में भी महंगाई का स्तर ऊंचा रहा, जो 40.7 प्रतिशत था। वहीं, टमाटर की कीमतें 35.3 प्रतिशत और नारियल (कोपरा) की कीमतें 44.6 प्रतिशत बढ़ गईं।

दूसरी ओर, सब्जियों की गिरती कीमतों से कुछ राहत मिलती रही। आलू की कीमतें पिछले साल की तुलना में 23.7 प्रतिशत कम हो गईं और प्याज की कीमतें 17.7 प्रतिशत गिर गईं, जिससे खाद्य की अन्य श्रेणियों में हुई बढ़ोतरी के कुछ हिस्से की भरपाई करने में मदद मिली। राज्यों के हिसाब से देखें तो महंगाई सबसे ज्यादा तेलंगाना में रही, जहां उपभोक्ता कीमतें 5.81 प्रतिशत बढ़ीं। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 4.2 प्रतिशत, तमिलनाडु में 4.18 प्रतिशत और कर्नाटक में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

आरबीआई का अनुमान

बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले महीने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत रखा था। इसमें पहली तिमाही के लिए चार प्रतिशत महंगाई का अनुमान जताया गया। आरबीआई ने कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा संसाधनों की ऊंची कीमतें और संभावित 'अल नीनो' प्रभाव के कारण महंगाई बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।

सीईए ने क्या कहा?

इस बीच, भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट भुगतान संतुलन का एक वास्तविक दबाव परीक्षण है। इसका मुद्रास्फीति, चालू खाते और रुपये पर सीधा प्रभाव पड़ता है। हालांकि, भारत की मजबूत राजकोषीय नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और सुधार संघर्ष के मौजूदा माहौल से निपटने के लिए एक मजबूत आधार हैं।

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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