कीमतों मे हेरफेर कर रही थीं स्टील कंपनियां, टाटा से जिंदल-SAIL तक लपेटे में

Jan 06, 2026 05:22 pm ISTDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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टाटा स्टील, JSW स्टील, सरकारी कंपनी SAIL और 25 दूसरी कंपनियों ने स्टील बेचने की कीमतों पर मिलीभगत करके एंटीट्रस्ट कानून तोड़ा है। इस वजह से इन कंपनियों और एग्जीक्यूटिव्स पर भारी जुर्माना लगने का खतरा है।

कीमतों मे हेरफेर कर रही थीं स्टील कंपनियां, टाटा से जिंदल-SAIL तक लपेटे में

टाटा समूह की टाटा स्टील, JSW स्टील, सरकारी कंपनी SAIL और 25 दूसरी कंपनियों ने स्टील बेचने की कीमतों पर मिलीभगत करके एंटीट्रस्ट कानून तोड़ा है। इस वजह से इन कंपनियों और एग्जीक्यूटिव्स पर भारी जुर्माना लगने का खतरा है। जानकारी के मुताबिक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने JSW के अरबपति मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के CEO टी.वी. नरेंद्रन और SAIL के चार पूर्व चेयरपर्सन सहित 56 टॉप अधिकारियों को 2015 और 2023 के बीच अलग-अलग समय में कीमतों में मिलीभगत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दी गई है। हालांकि, रिपोर्ट पर JSW ने कमेंट करने से मना कर दिया जबकि टाटा स्टील, SAIL समेत CCI अधिकारियों ने भी जवाब नहीं दिया है।

क्या है रिपोर्ट में

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक गोपनीय दस्तावेज में पता चला है कि टाटा स्टील, JSW स्टील, सरकारी कंपनी सेल (SAIL) समेत 25 अन्य कंपनियों ने स्टील की बिक्री कीमतों को लेकर आपसी मिलीभगत की और इस तरह प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन किया। CCI के 6 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, कुल 56 वरिष्ठ अधिकारियों को भी कीमतों में सांठगांठ के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। हालांकि, यह आदेश अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन यह मामला सामने आने के बाद स्टील उद्योग में हलचल तेज हो गई है।

कब जांच शुरू की गई?

इस जांच की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब बिल्डरों के एक समूह ने एक राज्य अदालत में आपराधिक मामला दायर कर आरोप लगाया था कि नौ स्टील कंपनियां मिलकर स्टील की आपूर्ति सीमित कर रही हैं और कीमतें बढ़ा रही हैं। इसके बाद CCI ने जांच का दायरा बढ़ाया और 2022 में कुछ छोटी स्टील कंपनियों पर छापेमारी भी की गई थी। बाद में यह जांच और व्यापक हुई, जिसमें 31 कंपनियां, उद्योग संगठन और दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी जांच के दायरे में आए। CCI के नियमों के तहत, कार्टेल या कीमतों में मिलीभगत से जुड़े मामलों का विवरण जांच पूरी होने से पहले सार्वजनिक नहीं किया जाता। आयोग के आदेश में कहा गया है कि जांच में यह पाया गया कि संबंधित पक्षों का आचरण भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून के विपरीत है और कुछ व्यक्तियों को व्यक्तिगत रूप से भी जिम्मेदार ठहराया गया है। यह किसी भी एंटीट्रस्ट मामले में एक अहम पड़ाव माना जाता है।

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है। और पढ़ें
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