भारत को $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लिए 3,000-3,500 लाख करोड़ के निवेश की जरूरत
मुख्य बातें
- वित्त वर्ष 2015 में जहां सरकारी खर्च लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, वह वित्त वर्ष 2027 के बजट में 12.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है
- यानी इस अवधि में 600% से अधिक की बढ़ोतरी हो गई
एसबीआई के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने कहा है कि भारत को 2047 तक $30 ट्रिलियन यानी 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए लगभग 3,000 से 3,500 लाख करोड़ रुपये के पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी। यह रकम लंबे समय के विकास के लिए जरूरी फंडिंग के बड़े पैमाने को दिखाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि विकसित भारत मिशन के लिए अकेले 2035 तक लगभग 600-650 लाख करोड़ रुपये जुटाने होंगे। सेट्टी ने कहा कि भारत की फंडिंग जरूरतें सिर्फ बैंक फाइनेंसिंग से पूरी नहीं हो सकतीं। सेट्टी के मुताबिक, घरेलू बचतों का ट्रेंड अब बैंक जमा की बजाय म्यूचुअल फंड, बीमा और पेंशन उत्पादों की ओर बढ़ रहा है।
सरकारी खर्च 600% से अधिक बढ़ा
सीएनबीसी टीवी-18 के मुताबिक वित्त वर्ष 2015 में जहां सरकारी खर्च लगभग 2 लाख करोड़ रुपये था, वह वित्त वर्ष 2027 के बजट में 12.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यानी इस अवधि में 600% से अधिक की बढ़ोतरी हो गई। इस सरकारी निवेश ने निजी निवेश को बड़ा प्रोत्साहन दिया है। बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश से अनिश्चितता घटी है और परियोजनाओं की फिजीबिलिटी बढ़ी है, जिससे प्राइेट कैपिटल भी आकर्षित हो रही है।
बैंकिंग सेक्टर को लेकर क्या कहा
एनके सिंह ने बताया कि भारत का बैंकिंग सेक्टर मजबूत स्थिति में है। कुल एनपीए 2.5% है, जबकि निजी बैंकों का एनपीए 1.73% और विदेशी बैंकों का इससे भी कम है। 2008-17 के दौरान रही 'ट्विन बैलेंस शीट' समस्या अब हल हो चुकी है।
हालांकि, उन्होंने कई सुधारों की जरूरत बताई। जैसे, प्रॉयरिटी सेक्टर में उधारी के नियमों पर पुनर्विचार करना जहां, अभी 40% से अधिक उधारी इसी दायरे में है। सीआरआर और एसएलआर में कमी लाना, जो वर्तमान में 21% संसाधनों को रोकते हैं। बॉन्ड बाजार को और गहरा करना तथा टेक्नोलाजी और एआई के जरिए दक्षता बढ़ाना है।
इंफ्रा फाइनेंसिंग के नए मॉडल
सेट्टी ने बताया कि भारत में इंफ्रा फाइनेंसिंग के मॉडल बदल रहे हैं। एनआईआईएफ और NaBFID जैसी संस्थाएं इस क्षेत्र में काम कर रही हैं। साथ ही, InvITs और REITs मोनेटाइजेशन और कैपिटल रीसाइक्लिंग के लिए अहम उपकरण बन रहे हैं।
एमएसएमई बैंक लोन का सबसे तेजी से बढ़ता सेगमेंट बना हुआ है। कई बैंकों ने 20% से अधिक की वृद्धि दर्ज की है। दिसंबर 2025 तक एमएसएमई का बकाया कर्ज 67 लाख करोड़ रुपये था, जो सालाना आधार पर 16-18% की दर से बढ़ रहा है। हालांकि, औपचारिक कर्ज की पहुंच अभी भी 50% से कम है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


