मार्च तिमाही में 7.8% जीडीपी ग्रोथ, FY26 में शानदार रहा परफॉर्मेंस

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मुख्य बातें

  • ग्लोबल टेंशन के बीच इकोनॉमी के लिए अच्छी खबर है
  • सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत पर रही
  • यह इकोनॉमी की एक साल पहले के मुकाबले बेहतर परफॉर्मेंस है
मार्च तिमाही में 7.8% जीडीपी ग्रोथ, FY26 में शानदार रहा परफॉर्मेंस

ग्लोबली टेंशन के बीच मार्च तिमाही के दौरान देश की इकोनॉमी 7.8% की रफ्तार से बढ़ी है। हालांकि, एक तिमाही पहले के मुकाबले ग्रोथ में गिरावट दर्ज की गई है। बता दें कि दिसंबर तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8 प्रतिशत रही थी। मार्च तिमाही के आंकड़ों पर ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग का भी असर पड़ा है।

FY26 में शानदार परफॉर्मेंस

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत पर रही। यह इकोनॉमी की एक साल पहले के मुकाबले बेहतर परफॉर्मेंस है। एक साल पहले वित्त वर्ष 2024-25 में 7.1 प्रतिशत की दर से इकोनॉमी बढ़ी।

जीडीपी के 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने कहा कि स्थिर कीमतों पर जीडीपी का आकार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के पहले संशोधित अनुमान 299.89 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं, मौजूदा कीमतों पर जीडीपी का आकार 2025-26 में 346.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 318.07 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 8.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है।

जीडीपी की नई सीरीज

हाल ही में भारत ने जीडीपी की नई सीरीज अपनाई है, जिसमें 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है। इसके तहत राष्ट्रीय आय के आंकड़ों को अपडेट किया गया है ताकि महामारी के बाद उपभोग के बदलते स्वरूप और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ते प्रभाव को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके। संशोधित बेस ईयर के बाद जारी यह दूसरा जीडीपी आंकड़ा है।

रिजर्व बैंक का अनुमान

इस बीच, रिजर्व बैंक ने वैश्विक अनिश्चितताओें और कच्चे माल की ऊंची कीमत को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि के अनुमान को घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। पहले इसके इसके 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। यह 2025-26 के लिए अनुमानित 7.6 प्रतिशत से भी कम है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें तथा आपूर्ति में जारी व्यवधान आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकते हैं। आरबीआई के अनुसार, ग्लोबल सप्लाई चेन में लंबे समय तक बने रहने वाले व्यवधान, वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता एवं मौसम से जुड़े झटके घरेलू वृद्धि के लिए जोखिम बने हुए हैं।

वहीं, 2026-27 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है जो पहले के 4.6 प्रतिशत से कही अधिक है। तीसरी तिमाही में कीमतों पर दबाव 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है, उसके बाद इसमें कमी आने की संभावना है।

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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