₹1.72 लाख करोड़ खर्च! पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर सरकार का सबसे बड़ा खुलासा

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग मिशन तेजी से आगे बढ़ रहा है
  • संसद में सरकार ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले तीन इथेनॉल सप्लाई वर्षों में इथेनॉल खरीद पर करीब ₹1.72 लाख करोड़ खर्च किए हैं
  • देशभर में 501 इथेनॉल उत्पादन यूनिट इस कार्यक्रम से जुड़ी हैं
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पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने पर सरकार का सबसे बड़ा खुलासा

देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने (Ethanol Blended Petrol Programme) की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इसका मकसद सिर्फ पेट्रोल पर आयात निर्भरता कम करना ही नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, पर्यावरण को बेहतर बनाना और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना भी है। अब सरकार ने संसद में इस मिशन से जुड़े नए आंकड़े साझा किए हैं, जो बताते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां (PSU Oil Marketing Companies) इस योजना पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बताया कि इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले तीन एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) में एथेनॉल खरीद पर करीब ₹1.72 लाख करोड़ खर्च किए हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि देश में एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम लगातार मजबूत हो रहा है।

राज्यसभा में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लिखित जवाब में बताया कि ESY 2023-24 के दौरान तेल कंपनियों ने ₹48,757 करोड़ का एथेनॉल खरीदा। इसके बाद ESY 2024-25 में यह खर्च बढ़कर ₹73,996 करोड़ हो गया। वहीं ESY 2025-26 में जून 2026 तक ही ₹49,577 करोड़ का एथेनॉल खरीदा जा चुका है, यानी तीन सालों में कुल खर्च लगभग ₹1.72 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।

सरकार ने बताया कि तेल कंपनियां एथेनॉल की खरीद पूरी तरह घरेलू स्रोतों से करती हैं। इसमें गन्ने से बनने वाला C-Heavy Molasses, B-Heavy Molasses, गन्ने का रस और शुगर सिरप शामिल हैं। इसके अलावा अनाज आधारित एथेनॉल भी खरीदा जाता है, जिसमें खराब खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम (FCI) का अतिरिक्त चावल और मक्का प्रमुख स्रोत हैं। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने का अतिरिक्त बाजार भी मिलता है और चीनी मिलों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है।

सरकार के अनुसार, 16 जुलाई 2026 तक देशभर में 501 एथेनॉल निर्माण यूनिट सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के साथ पंजीकृत हो चुकी हैं। ये सभी यूनिट डिनैचर्ड एनहाइड्रस एथेनॉल की आपूर्ति करती हैं, जिसका उपयोग पेट्रोल में मिश्रण के लिए किया जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि तेल कंपनियां केवल एथेनॉल खरीद ही नहीं रही हैं, बल्कि खुद भी इसका उत्पादन कर रही हैं। इंडियन ऑयल (IOC) की उत्पादन क्षमता 228 किलोलीटर प्रतिदिन है और उसने ESY 2025-26 में जून तक 712 किलोलीटर एथेनॉल का उत्पादन किया। भारत पेट्रोलियम (BPCL) की क्षमता 200 किलोलीटर प्रतिदिन है, जबकि HPCL Biofuels की क्षमता 120 किलोलीटर प्रतिदिन है। HPCL Biofuels ने इसी अवधि में 9,373 किलोलीटर एथेनॉल का उत्पादन किया, जो तीनों में सबसे अधिक रहा।

अगर राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री में देश में पहले स्थान पर रहा। ESY 2024-25 के दौरान यहां 124.98 करोड़ लीटर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचा गया। इसके बाद महाराष्ट्र में 110.66 करोड़ लीटर, तमिलनाडु में 92.18 करोड़ लीटर, कर्नाटक में 79.24 करोड़ लीटर और गुजरात में 56.29 करोड़ लीटर की बिक्री दर्ज की गई।

सरकार का कहना है कि एथेनॉल सप्लाई नेटवर्क लगातार मजबूत हो रहा है और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को और गति मिलेगी। आने वाले सालों में इस मिशन से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, कच्चे तेल के आयात पर खर्च घटेगा, किसानों को नई आय के अवसर मिलेंगे और पर्यावरण को भी बड़ा फायदा होगा। यही वजह है कि सरकार इस कार्यक्रम को अपनी प्रमुख ऊर्जा रणनीतियों में शामिल कर तेजी से आगे बढ़ा रही है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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