US के आरोपों पर भारत का पलटवार!…दिया ऐसा जवाब कि अमेरिका भी हैरान, ये है पूरा मामला
मुख्य बातें
- अमेरिका की सेक्शन 301 जांच में भारत के टेक्सटाइल और स्टील सेक्टर पर अतिरिक्त एक्सेस कैपेसिटी के आरोप लगाए गए हैं
- भारत सरकार और उद्योग संगठनों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि देश का अधिकांश उत्पादन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए होता है

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मुद्दों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिका ने अपने सेक्शन 301 जांच के तहत आरोप लगाया है कि भारत टेक्सटाइल और स्टील जैसे क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता (Excess Capacity) बना रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है। हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि देश में होने वाला उत्पादन घरेलू मांग के अनुरूप है, न कि किसी अतिरिक्त निर्यात रणनीति का हिस्सा। भारत का कहना है कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में कपड़ा और स्टील जैसी बुनियादी जरूरतों की डिमांड लगातार बढ़ रही है, इसलिए उत्पादन क्षमता को केवल कुल आंकड़ों के आधार पर नहीं देखा जा सकता।
वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त व्यापार सचिव अमिताभ कुमार ने स्पष्ट कहा कि भारत में टेक्सटाइल और स्टील क्षेत्र में कोई अतिरिक्त उत्पादन क्षमता नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रति व्यक्ति उत्पादन और खपत के हिसाब से भारत अभी भी कई विकसित देशों से काफी पीछे है। ऐसे में अमेरिका का यह दावा कि भारत जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर रहा है, वास्तविकता से मेल नहीं खाता। भारत का तर्क है कि अगर किसी देश की आबादी और आर्थिक विकास तेजी से बढ़ रहे हों, तो वहां उत्पादन क्षमता का विस्तार स्वाभाविक है।
भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रमुख संस्था TEXPROCIL ने भी अमेरिका के आरोपों का जोरदार विरोध किया है। संस्था ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को विस्तृत जवाब भेजते हुए कहा कि भारत का कपड़ा उद्योग मुख्य रूप से घरेलू बाजार पर निर्भर है। भारत में बनने वाले कपड़ा उत्पादों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा देश के भीतर ही खप जाता है, यानी केवल 20 प्रतिशत से भी कम उत्पादन निर्यात के लिए जाता है। ऐसे में यह कहना कि भारत निर्यात बढ़ाने के लिए जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर रहा है, पूरी तरह गलत है।
TEXPROCIL ने यह भी बताया कि पिछले कुछ सालोंं में कपास, यार्न और फैब्रिक उत्पादन में कोई असामान्य उछाल नहीं आया है। कई क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि स्थिर या सीमित रही है। इसलिए स्ट्रक्चरल ओवरकैपेसिटी यानी स्थायी अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का दावा तथ्यों पर आधारित नहीं है। संस्था ने यह भी कहा कि भारतीय कपड़ा उद्योग रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और घरेलू उपभोग का महत्वपूर्ण आधार है।
अमेरिका की सेक्शन 301 जांच केवल टेक्सटाइल तक सीमित नहीं है। इसमें स्टील, पेट्रोकेमिकल्स, हेल्थ प्रोडक्ट्स, ऑटोमोबाइल और सोलर मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कुछ देश सरकारी सब्सिडी, मजदूरी नियंत्रण और अन्य नीतियों के जरिए अपने उद्योगों को अनुचित लाभ पहुंचाते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार संतुलन बिगड़ता है। अमेरिका ने भारत के साथ अपने व्यापार घाटे और कुछ क्षेत्रों में बढ़ती भारतीय प्रतिस्पर्धा को भी जांच का आधार बनाया है।
हालांकि, भारत का कहना है कि उसकी औद्योगिक नीतियां घरेलू विकास, रोजगार सृजन और बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए बनाई गई हैं। एक्सपर्ट का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही यह बहस आने वाले समय में व्यापार वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने उद्योगों के हितों की रक्षा करेगा और किसी भी गलत धारणा या आरोप का तथ्यों के आधार पर जवाब देगा। ऐसे में यह मामला केवल व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक रणनीति की एक महत्वपूर्ण परीक्षा भी बन गया है।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
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ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
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