डीजल ट्रक-बसों पर लग सकता है ब्रेक! सरकार की इस नई तरकीब से घटेगी डीजल की खपत
भारत सरकार देश में इलेक्ट्रिक बस और ट्रकों को बढ़ावा देने के लिए 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा की प्रोत्साहन योजना पर विचार कर रही है। इस योजना का उद्देश्य डीजल पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और प्रदूषण घटाना है।

भारत में प्रदूषण को कम करने और महंगे डीजल-पेट्रोल से मुक्ति पाने के लिए केंद्र सरकार एक बहुत बड़े और ऐतिहासिक कदम पर विचार कर रही है। देश में बढ़ते ऊर्जा संकट और खाड़ी देशों (Middle East) के युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई में आ रही रुकावटों को देखते हुए सरकार अब प्राइवेट सेक्टर को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए बड़ा बूस्ट देने वाली है। जानकारी के मुताबिक, सरकार प्राइवेट ऑपरेटर्स को इलेक्ट्रिक बसें और ट्रक खरीदने के लिए 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा का एक भारी-भरकम सब्सिडी पैकेज देने की योजना बना रही है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
यह प्रोग्राम अगले 10 सालों के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसका मुख्य लक्ष्य भारत के कमर्शियल व्हीकल के बेड़े को पूरी तरह से बदलना है। इस योजना का सबसे बड़ा हिस्सा इंटर-सिटी (एक शहर से दूसरे शहर चलने वाली) प्राइवेट बसों के लिए तय किया जा सकता है। इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए इसी महीने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और ऑटोमोबाइल उद्योग के दिग्गजों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होने की उम्मीद है।
प्राइवेट बसों और ट्रकों पर ही क्यों है सरकार का ध्यान?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत पिछले 5 सालों में बहुत तेजी से हुई है, लेकिन इसका फायदा अब तक केवल सरकारी परिवहन निगमों (जैसे राज्य सरकारों की सरकारी बसें) को ही मिला है। हकीकत यह है कि आज भी भारत की सड़कों पर दौड़ने वाली नई बसों में से ज्यादातर डीजल से चलती हैं। चर्चाओं के अनुसार, भारत की सड़कों पर इस समय 20 लाख से अधिक बसें दौड़ रही हैं, लेकिन सरकार के नियंत्रण में इनका केवल 5% हिस्सा ही है, बाकी की 95% बसें प्राइवेट ऑपरेटर्स द्वारा चलाई जाती हैं। इसी तरह देश में सबसे ज्यादा डीजल की खपत करने वाले लगभग सभी ट्रक पूरी तरह से प्राइवेट मालिकों के हाथ में हैं। जब तक ये प्राइवेट ऑपरेटर इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ नहीं बढ़ेंगे, तब तक देश को प्रदूषण और डीजल की निर्भरता से मुक्ति नहीं मिल सकती।
कच्चा तेल और प्रदूषण: दोतरफा मार से बचने की कोशिश
सरकार की इस जल्दबाजी के पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं।
महंगा क्रूड ऑयल (कच्चा तेल):- भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है। खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण तेल की कीमतें कभी भी बढ़ जाती हैं, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का खतरा (Imported Inflation) हमेशा बना रहता है।
जहरीली हवा:- इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन के अध्ययनों के अनुसार, नई दिल्ली जैसे बड़े शहरों में हर साल होने वाले खतरनाक वायु प्रदूषण में अकेले वाहनों से निकलने वाले धुएं की हिस्सेदारी 40% तक होती है। कमर्शियल वाहनों को इलेक्ट्रिक करने से इस समस्या का सीधा समाधान निकलेगा।
प्राइवेट ऑपरेटर्स को छूट?
छोटे कमर्शियल फ्लीट ऑपरेटर्स (जिनके पास 2 से 5 बसें या ट्रक हैं) के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां डीजल गाड़ियों के मुकाबले बहुत महंगी होती हैं और बैंक इन्हें आसानी से लोन (फाइनेंस) नहीं देते। इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार निम्नलिखित कदम उठाने पर विचार कर रही है।
₹15 लाख तक की ब्याज छूट:- योजना के तहत सरकार हर वाहन पर उसके पूरे जीवनकाल (Lifetime) में ₹15 लाख ($17,500) तक की ब्याज सहायता (Interest Subvention) दे सकती है। यह मदद शुरुआती सालों में ज्यादा होगी और समय के साथ धीरे-धीरे कम होती जाएगी।
लोन की गारंटी (Credit Guarantee):- बैंकों का डर दूर करने के लिए सरकार एक 'आंशिक क्रेडिट गारंटी तंत्र' बनाएगी, यानी अगर कोई ऑपरेटर लोन नहीं चुका पाता, तो उसका कुछ नुकसान सरकार उठाएगी। इससे प्राइवेट कंपनियों को इलेक्ट्रिक ट्रक और बस खरीदने के लिए लोन दे सकेंगे।
कितने वाहनों को मिलेगा फायदा?
शुरुआती चर्चाओं के अनुसार, इस योजना के पहले चरण में 10,000 इलेक्ट्रिक बसों को कवर किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 40,000 से 50,000 वाहनों तक करने का लक्ष्य है। इसके अलावा वाहन निर्माताओं और ऑपरेटरों ने सरकार से नेशनल हाईवे पर स्पेशल चार्जिंग पार्क बनाने, टोल टैक्स और रोड टैक्स में छूट देने तथा बिजली की दरों में रियायत देने की भी मांग की है, ताकि गाड़ियों को चलाने का रोजाना का खर्च (Operating Cost) कम हो सके।
चीन इस समय लाखों इलेक्ट्रिक ट्रक और बसें चला रहा है, जबकि अमेरिका और यूरोप भी अपने पब्लिक ट्रांसपोर्ट को तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में भारत का यह $1 बिलियन का नया दांव न केवल भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को 'मेक इन इंडिया' के तहत मजबूत बनाएगा, बल्कि भविष्य में आम जनता के लिए सफर को भी प्रदूषण मुक्त और किफायती बना देगा।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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