
टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर, 1 अप्रैल से बदल रहे हैं इनकम टैक्स के अहम नियम
Income Tax Rule: ये बदलाव इसलिए भी अहम हैं क्योंकि 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने जा रहा है। भले ही ये फैसले सुर्खियों में न रहे हों, लेकिन रिटर्न फाइल करने से लेकर पेनल्टी और नोटिस तक, सब कुछ बदलने वाला है।
New Income Tax Rule: केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के बाद सरकार ने चुपचाप कई ऐसे टैक्स बदलाव साफ किए हैं, जो आम टैक्सपेयर्स की जिंदगी पर सीधा असर डालने वाले हैं। वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के जरिए FAQ जारी कर बताया है कि बजट के कई प्रस्ताव जमीन पर कैसे लागू होंगे। ये बदलाव इसलिए भी अहम हैं क्योंकि 1 अप्रैल 2026 से देश में नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने जा रहा है। भले ही ये फैसले सुर्खियों में न रहे हों, लेकिन रिटर्न फाइल करने से लेकर पेनल्टी और नोटिस तक, सब कुछ बदलने वाला है।
अब क्या बदलेगा
अब टैक्सपेयर्स को अपडेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। पहले जहां सीमित समय था, अब कोई भी व्यक्ति 4 साल यानी 48 महीने तक अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकता है, चाहे उसने पहले रिटर्न भरा हो या नहीं। हालांकि देरी जितनी ज्यादा होगी, अतिरिक्त टैक्स भी उतना ही बढ़ेगा—25 फीसदी से लेकर 70 फीसदी तक। अच्छी बात यह है कि अब अपडेटेड रिटर्न के जरिए नुकसान (Loss) को कम करना भी संभव होगा और री-असेसमेंट नोटिस आने के बाद भी अपडेटेड रिटर्न फाइल की जा सकेगी, जिस पर पेनल्टी नहीं लगेगी।
यहां भी राहत
छोटे कारोबारियों और नॉन-ऑडिट मामलों में राहत दी गई है। ऐसे मामलों में ITR भरने की आखिरी तारीख अब 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है। वहीं, सड़क हादसों में मिलने वाले मुआवजे पर ब्याज अब पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है और इस पर TDS भी नहीं कटेगा। प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी राहत है—अगर कोई रेजिडेंट व्यक्ति किसी NRI से संपत्ति खरीदता है, तो अब उसे TDS काटने के लिए TAN लेने की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ PAN से काम चल जाएगा।
TDS नियम होंगे आसान
बजट 2026 में TDS नियमों को भी आसान और साफ किया गया है। मैनपावर सप्लाई को अब साफ तौर पर “कॉन्ट्रैक्ट वर्क” माना जाएगा, जिससे TDS को लेकर कन्फ्यूजन खत्म होगी। छोटे टैक्सपेयर्स अब लोअर या निल TDS सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। निवेशकों को भी राहत दी गई है—म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और डिविडेंड इनकम के लिए अलग-अलग डिक्लेरेशन देने की जगह अब एक ही डिक्लेरेशन काफी होगी।
अनएक्सप्लेंड इनकम पर बदलाव
सबसे बड़ा बदलाव अनएक्सप्लेंड इनकम यानी अघोषित आय को लेकर आया है। पहले जहां इस पर 60 फीसदी टैक्स लगता था, अब इसे घटाकर 30 फीसदी कर दिया गया है। अगर टैक्सपेयर खुद रिटर्न में ऐसी आय घोषित करता है, तो उस पर कोई पेनल्टी भी नहीं लगेगी। इसके अलावा, टैक्स डिपार्टमेंट अब असेसमेंट और पेनल्टी का एक ही ऑर्डर जारी कर सकेगा, जिससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। कई मामलों में पेनल्टी और प्रॉसिक्यूशन से इम्युनिटी का दायरा भी बढ़ा दिया गया है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 सिर्फ टैक्स स्लैब तक सीमित नहीं है, बल्कि टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल, कम डरावना और डिजिटल बनाने की कोशिश है। PF और ESI जमा करने की डेडलाइन को भी ITR फाइलिंग से जोड़ दिया गया है। ऐसे में टैक्सपेयर्स के लिए जरूरी है कि वे इन 'शांत' लेकिन असरदार बदलावों को समझें, क्योंकि नया इनकम टैक्स कानून लागू होते ही यही नियम उनकी टैक्स प्लानिंग और कंप्लायंस की दिशा तय करेंगे।





