₹1.33 करोड़ कैश जमा, ITR भी नहीं भरा... फिर भी आयकर विभाग से जीत गया ये शख्स!

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • मैसूर के एक रिटायर्ड शिक्षक ने बैंक खाते में ₹1.33 करोड़ नकद जमा किए और ITR भी दाखिल नहीं किया
  • आयकर विभाग ने नोटिस जारी कर दोबारा असेसमेंट किया, लेकिन ITAT बेंगलुरु ने विभाग की कार्रवाई रद्द कर दी क्योंकि धारा 148 का नोटिस तय समय सीमा खत्म होने के 26 दिन बाद जारी किया गया था
 itr filing case
करोड़ों की कैश एंट्री के बाद भी शख्स जीत गया टैक्स केस।

अगर कोई व्यक्ति अपने बैंक खाते में ₹1.33 करोड़ नकद जमा कर दे और साथ ही इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भी दाखिल न करे, तो आमतौर पर माना जाता है कि उसके खिलाफ आयकर विभाग की कार्रवाई तय है। लेकिन, मैसूर (कर्नाटक) के एक रिटायर्ड शिक्षक के मामले में कहानी बिल्कुल अलग निकली। आयकर विभाग ने नोटिस भेजा, दोबारा असेसमेंट किया और लाखों रुपये की आय जोड़ दी, लेकिन आखिर में बेंगलुरु आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने शिक्षक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पूरी कार्रवाई को ही रद्द कर दिया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि यह जीत किसी तकनीकी गलती की वजह से मिली, न कि इस आधार पर कि उनके खाते में जमा रकम सही थी या गलत। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

दरअसल, मैसूर के रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक मारथिक्यथानहल्ली ने आकलन वर्ष (AY) 2015-16 के दौरान अपने बैंक खाते में करीब ₹1.33 करोड़ नकद जमा किए थे। उन्होंने उस साल का ITR दाखिल नहीं किया, जिसके कारण CBDT के रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी (RMS) सिस्टम ने इस लेनदेन को संदिग्ध मानते हुए आयकर विभाग को अलर्ट भेजा। विभाग के पास जानकारी थी कि उनकी मुख्य आय खेती और बचत खाते के ब्याज से होती है, लेकिन इतनी बड़ी नकद राशि जमा होने से विभाग को शक हुआ कि कहीं यह अघोषित आय तो नहीं है।

इसके बाद 26 मार्च 2022 को आयकर विभाग ने उन्हें धारा 148A(b) के तहत पहला नोटिस जारी किया। शिक्षक ने इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद 26 अप्रैल 2022 को आकलन अधिकारी (AO) ने धारा 148A(d) के तहत आदेश जारी करते हुए धारा 148 का नोटिस भेजा और ITR दाखिल करने को कहा। उन्होंने बाद में ITR तो दाखिल किया, लेकिन उसका ई-वेरिफिकेशन नहीं किया, इसलिए वह अमान्य माना गया। आगे चलकर विभाग ने कई नोटिस भेजे और अंत में धारा 147 और 144 के तहत पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) करते हुए उनकी कुल आय ₹48.85 लाख निर्धारित कर दी। साथ ही ₹48.73 लाख को अघोषित आय मानते हुए टैक्स लगाया गया।

CIT(A) से नहीं मिली राहत

शिक्षक ने पहले CIT(A) के पास अपील की, लेकिन वहां उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला ITAT बेंगलुरु पहुंचा। यहां उनके वकीलों ने सबसे अहम दलील यह दी कि आयकर विभाग ने धारा 148 का नोटिस तय समय सीमा समाप्त होने के 26 दिन बाद जारी किया था। पुराने कानून के अनुसार AY 2015-16 के लिए नोटिस जारी करने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2022 थी। कुछ प्रक्रियात्मक छूट जोड़ने के बाद भी अधिकतम 12 अप्रैल 2022 तक ही नोटिस जारी किया जा सकता था, लेकिन विभाग ने नोटिस 26 अप्रैल 2022 को भेजा।

ITAT ने इसी आधार को स्वीकार करते हुए कहा कि जब नोटिस ही समय सीमा (Limitation Period) के बाद जारी हुआ है, तो पूरा पुनर्मूल्यांकन कानून की नजर में अमान्य हो जाता है। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 148A की प्रक्रिया का पालन करने से समय सीमा की कानूनी बाध्यता खत्म नहीं होती, यानी अगर नोटिस तय समय के बाद भेजा गया है तो बाद की सारी कार्रवाई स्वतः निरस्त मानी जाएगी।

अपने फैसले में ITAT ने सुप्रीम कोर्ट के राजीव बंसल मामले और कर्नाटक हाईकोर्ट के मोहम्मद यासीन मामले का भी हवाला दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि पुराने कानून के तहत जहां नोटिस जारी करने की समय सीमा समाप्त हो चुकी हो, वहां नए प्रावधानों का सहारा लेकर विभाग दोबारा मामला नहीं खोल सकता।

यह फैसला करदाताओं के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे साफ हो गया कि आयकर विभाग को भी कानून में तय समय-सीमा का सख्ती से पालन करना होगा। अगर विभाग समय सीमा के बाद नोटिस जारी करता है, तो चाहे मामला कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसकी पूरी कार्रवाई अदालत में टिक नहीं पाएगी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बड़ी नकद जमा राशि या ITR न भरने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। अगर विभाग समय रहते सही प्रक्रिया अपनाता है, तो वह जांच और टैक्स वसूली दोनों कर सकता है। लेकिन, इस मामले में केवल 26 दिन की देरी ने पूरे केस का रुख बदल दिया और रिटायर्ड शिक्षक को बड़ी कानूनी राहत मिल गई।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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