सेफगार्ड ड्यूटी का असर: भारत में स्टील आयात में रिकॉर्ड गिरावट, निर्यात में उछाल
मुख्य बातें
- Steel Export Import: वित्त वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में भारत में स्टील आयात में तेज गिरावट आई है, लेकिन देश अभी भी नेट आयातक बना हुआ है
- वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की पहली छमाही में भारत का स्टील आयात 30% घटकर 3.3 मिलियन टन रह गया

वित्त वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में भारत में स्टील आयात में तेज गिरावट आई है, लेकिन देश अभी भी नेट आयातक बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की पहली छमाही में भारत का स्टील आयात 30% घटकर 3.3 मिलियन टन रह गया। इसका कारण आयात पर लगाए गए टैक्स और घरेलू कीमतों में नरमी है।
फिर भी भारत नेट इंपोर्टर: आयात में गिरावट के बावजूद, आयात की मात्रा निर्यात से 0.5 मिलियन टन अधिक रही, यानी भारत अब भी नेट आयातक है।
स्टील निर्यात में 21% वृद्धि
निर्यात 21% बढ़कर 2.8 मिलियन टन पहुंचा, जिसमें यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया से मांग बढ़ी। सितंबर 2025 में निर्यात 0.58 मिलियन टन रहा, जो इन छह महीनों में सबसे ज्यादा था। पिछले साल अप्रैल–सितंबर 2024-25 में आयात 4.74 मिलियन टन और निर्यात 2.31 मिलियन टन था, जिससे 2.43 मिलियन टन का बड़ा घाटा दर्ज हुआ था।
घरेलू उत्पादन और खपत में मजबूती: देश में तैयार स्टील का उत्पादन 11% बढ़कर 78.6 मिलियन टन और खपत 9% बढ़कर 78.9 मिलियन टन रही। यह मजबूत मांग का संकेत है।
आयात घटाने में सेफगार्ड ड्यूटी का असर: विशेष स्टील उत्पादों के आयात पर 12% सेफगार्ड ड्यूटी (21 अप्रैल से लागू) और चीन व वियतनाम पर एंटी-डंपिंग ऐक्शन से आयात में कमी आई। घरेलू कीमतें निर्यात ऑफर से कम होने के कारण स्थानीय मिलों की क्षमता उपयोग दर बढ़ी।
कुछ विशेष ग्रेड में आयात पर निर्भरता: ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिकल स्टील जैसी कुछ ग्रेड का घरेलू उत्पादन न होने के कारण आयात अभी भी जरूरी है।
यूरोप से बढ़ी निर्यात मांग
ईयू में मांग की बहाली और सप्लाई संकट के चलते भारतीय मिलों ने ज्यादा ऑर्डर हासिल किए। जनवरी 2026 से लागू होने वाले कॉर्बन बॉर्डर एजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) से पहले यूरोपीय खरीदार सस्ता स्टील खरीद रहे हैं।
सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) का असर
सरकार का कैपेक्स तेजी से बढ़ा है। पहले पांच महीनों में बजट का 38.5% खर्च हुआ, जबकि पिछले साल यह 27% था। इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण गतिविधियों से लंबी स्टील उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिनका भारत में आयात लगभग नहीं होता।
मासिक उत्पादन और खपत का आंकड़ा
अप्रैल–सितंबर के दौरान तैयार स्टील की मासिक औसत खपत 13.15 मिलियन टन रही। अगस्त में अधिकतम 13.77 मिलियन टन और अप्रैल में न्यूनतम 12.03 मिलियन टन रही। मासिक औसत उत्पादन 13.09 मिलियन टन रहा, अगस्त में अधिकतम 13.44 मिलियन टन और अप्रैल में न्यूनतम 12.63 मिलियन टन रहा।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


