ईरान युद्ध का भारत के रियल एस्टेट पर असर, 5.4 लाख घरों की डिलीवरी पर संकट, कोविड काल जैसा खतरा
मुख्य बातें
- War Impacts Report: पश्चिम एशिया युद्ध के चलते घर खरीदारों के लिए बुरी खबर है
- 2026 में लाखों फ्लैट्स की डिलीवरी लेट हो सकती है
- इससे मुंबई-पुणे समेत 7 बड़े शहरों में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर खतरा मंडरा रहा है
- तेल से लेकर स्टील तक महंगा होने सेबिल्डरों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं

भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक नई चिंता सामने आई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन, शिपिंग रूट्स और कमोडिटी बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता का असर अब देश के हाउसिंग सेक्टर पर भी पड़ने लगा है। भारत के रियल एस्टेट मार्केट पर ईरान युद्ध के असर को लेकर कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में देश के सात प्रमुख शहरों में डिलीवर होने वाले करीब 5.4 लाख घरों की समय पर डिलीवरी प्रभावित हो सकती है।
2026 में सबसे ज्यादा घरों की डिलीवरी का है टार्गेट,लेकिन…
रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2023 के बीच लॉन्च हुई कई आवासीय परियोजनाएं अब अंतिम निर्माण चरण में हैं। इसी वजह से 2026 में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर रिजन (MMR), पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में रिकॉर्ड 5.4 लाख आवासीय इकाइयों की डिलीवरी का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी रहने वाला संघर्ष इस लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है।
मुंबई-पुणे पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक जोखिम मुंबई महानगर रिजन और पुणे में है। दोनों शहरों में इस साल डिलीवर होने वाले घरों की संख्या कुल लक्ष्य का 57% है। MMR में 2026 के दौरान 2.07 लाख से अधिक घरों की डिलीवरी प्रस्तावित है। दूसरी ओर पुणे में करीब 1 लाख घरों की डिलीवरी होनी है। अगर बिल्डिंग मैटेरियल्स की लागत और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ते हैं तो इन प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन प्रभावित हो सकती है।
दक्षिण भारत के शहर भी प्रभावित
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों में भी 1.68 लाख से ज्यादा घरों की डिलीवरी पर असर पड़ सकता है। बेंगलुरु में 69,000 यूनिट, हैदराबाद में 63,700 यूनिट और चेन्नई में 35,600 यूनिट पर खतरा मंडरा रहा है।
कोविड काल जैसा खतरा?
रिपोर्ट में कोविड-19 का उदाहरण भी दिया गया है। 2020 में देश के सात बड़े शहरों में 4.66 लाख घरों की डिलीवरी का लक्ष्य था, लेकिन लॉकडाउन, श्रमिकों के पलायन और सप्लाई चेन बाधित होने के कारण केवल 2.14 लाख घर (46%) ही समय पर डिलीवर हो पाए थे।
क्यों बढ़ी चिंता?
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, समुद्री मालभाड़े में वृद्धि और स्टील, एल्युमिनियम जैसी बिल्डिंग मैटेरियल्स की लागत बढ़ सकती है। इससे बिल्डरों की लागत बढ़ेगी और परियोजनाओं की डिलीवरी में देरी हो सकती है।
एनारॉक के रिसर्च एंड एडवाइजरी प्रमुख प्रशांत ठाकुर के मुताबिक, डेवलपर्स की वित्तीय स्थिति पहले से बेहतर है और तकनीक की मदद से प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग भी मजबूत हुई है, लेकिन लंबे समय तक जारी भू-राजनीतिक तनाव परियोजनाओं की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकता है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


