झुनझुनवाला की बड़ी हिस्सेदारी वाली IKS का इस अमेरिकी कंपनी पर 600 मिलियन डॉलर का दांव

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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भारतीय कंपनी IKS अमेरिकी कंपनी ट्रूब्रिज को खरीदने के लिए डील कर रही है। आईकेएस में झुनझुनवाला फैमिली की बड़ी हिस्सेदारी है। ट्रूब्रिज अमेरिका के छोटे शहरों के अस्पतालों और स्वास्थ्य संगठनों को टेक्नोलॉजी और सेवाएं देती है।

झुनझुनवाला की बड़ी हिस्सेदारी वाली IKS का इस अमेरिकी कंपनी पर 600 मिलियन डॉलर का दांव

हेल्थ केयर से जुड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी इन्वेंचुरस नॉलेज सॉल्यूशंस (IKS) अमेरिका की कंपनी ट्रूब्रिज (TruBridge) को खरीदने की डील आखिरी चरण की में है। यह सौदा करीब 600 मिलियन डॉलर का हो सकता है। आईकेएस में झुनझुनवाला की बड़ी हिस्सेदारी है। द इकनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक जानकारों का कहना है कि अगर यह डील हो जाती है, तो यह IKS की अब तक की सबसे बड़ी खरीदारी होगी। इससे अमेरिका के हेल्थ मार्केट में कंपनी की पकड़ और मजबूत हो जाएगी।

आज फोकस में रहेगा शेयर

इस खबर के बाद निवेशकों की नजर आज इस शेयर पर रहेगी। बता दें IKS के शेयर शुक्रवार को 3.50 प्रतिशत चढ़कर 1529 रुपये पर बंद हुए थे। पिछले एक महीने में यह स्टॉक 15 फीसद से अधिक उछला है। हालांकि, इस साल अबतक इसमें 9.11 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसका 52 हफ्ते का हाई 1876 रुपये और लो 1262 रुपये है।

झुनझुनवाला फैमिली की कंपनी में कितनी है हिस्सेदारी

IKS के शेयर दिसंबर 2024 में जब मार्केट में लिस्ट हुए तो झुनझुनवाला फैमिली को अपने निवेश पर 530 गुना का फायदा हुआ था। फिलहाल, प्रमोटर फैमिली के तीन ट्रस्टों के पास कंपनी में 63.7% हिस्सेदारी है। रेखा झुनझुनवाला (राकेश झुनझुनवाला की पत्नी) के पास 0.23% और कंपनी के संस्थापक सचिन गुप्ता के पास 33.57% हिस्सा है।

IKS क्या काम करती है?

यह कंपनी अमेरिका के डॉक्टरों और अस्पतालों को उनके डॉक्यूमेंटेशन का काम, मरीजों का शेड्यूल, बिल बनाने और पेमेंट से जुड़े कामों (रेवेन्यू साइकिल मैनेजमेंट) को आसान बनाने में मदद करती है। पहले ही IKS 200 मिलियन डॉलर में इक्विटी सॉल्यूशंस नाम की कंपनी को खरीद चुकी है।

ट्रूब्रिज क्या है और उसकी हालत कैसी है?

ट्रूब्रिज भी अमेरिका के छोटे शहरों के अस्पतालों और स्वास्थ्य संगठनों को टेक्नोलॉजी और सेवाएं देती है। पिछले एक साल में इसका रेवेन्यू 342 मिलियन डॉलर से बढ़कर 346.8 मिलियन डॉलर हो गया है और यह घाटे से उबरकर मुनाफे में आ गई है। फिलहाल ट्रूब्रिज की मार्केट वैल्यू 270 मिलियन डॉलर है, जबकि IKS का मूल्य 2.84 बिलियन डॉलर है।

पैसे का इंतजाम कैसे होगा?

इस अधिग्रहण के लिए IKS सिटी बैंक, डॉयचे बैंक और जेपी मॉर्गन से 675 मिलियन डॉलर का कर्ज जुटाने की बातचीत कर रही है। इस पैसे से वह ट्रूब्रिज को खरीदेगी और उसका पुराना कर्ज भी चुकाएगी।

इस उद्योग में होड़ क्यों मची है?

अमेरिका में हेल्थकेयर से जुड़े आउटसोर्सिंग का बाजार हर साल 12% बढ़ रहा है। मुनाफा कमाने के लिए कई बड़ी कंपनियां इस सेक्टर में डील कर रही हैं। हाल के वर्षों में ब्लैकस्टोन, कार्लाइल जैसी दिग्गज कंपनियों ने अरबों डॉलर के सौदे किए हैं। IKS भी इसी कड़ी में अपनी बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है।

(डिस्‍क्‍लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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