किसानों और कर्मचारियों के लिए IFFCO का बड़ा तोहफा, सैलरी से लेकर बोनस तक ऐलान
मुख्य बातें
- IFFCO की 55वीं AGM में पहली बार महिलाओं को सहकारिता रत्न और सहकारिता बंधु पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया
- जम्मू-कश्मीर और गुजरात की महिला सहकारिता नेताओं को ₹11-11 लाख के पुरस्कार मिले

भारत के सहकारी आंदोलन (Cooperative Movement) में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व को नई पहचान देते हुए इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड यानी IFFCO ने अपनी 55वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में एक ऐतिहासिक कदम उठाया। इस बार पहली बार IFFCO के दोनों प्रतिष्ठित सहकारिता पुरस्कार महिला सहकारिता नेताओं को दिए गए। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से 850 से अधिक सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, किसान नेता और सदस्य शामिल हुए। इस मौके पर IFFCO ने यह संदेश दिया कि अब भारतीय सहकारी आंदोलन में महिलाओं की भूमिका सिर्फ भागीदारी तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व तक पहुंच चुकी है।
IFFCO के चेयरमैन दिलीप संघानी ने कहा कि 2026 को “अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष” घोषित किया गया है और ऐसे समय में महिलाओं को सम्मानित करना बेहद खास है। उन्होंने कहा कि किसान, सहकारी संस्थाएं और IFFCO के कर्मचारी ही इस संस्था की असली ताकत हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विजन का जिक्र करते हुए कहा कि IFFCO उसी दिशा में लगातार काम कर रहा है, ताकि गांव और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके।
इस ऐतिहासिक AGM में जम्मू-कश्मीर की शकीला अख्तर को “IFFCO सहकारिता रत्न पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान ग्रामीण महिलाओं को कृषि और सहकारी आंदोलन से जोड़ने और जमीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण के लिए दिया गया। इसके साथ उन्हें ₹11 लाख की पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई।
वहीं गुजरात की भावना गोंडलिया को “IFFCO सहकारिता बंधु पुरस्कार” और ₹11 लाख की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने महिलाओं को खेती और सहकारी गतिविधियों में आगे बढ़ाने के लिए उल्लेखनीय काम किया है।
IFFCO की AGM में वित्तीय प्रदर्शन भी चर्चा का बड़ा विषय रहा। IFFCO के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने बताया कि संस्था ने इस वर्ष ₹4585 करोड़ का मुनाफा कमाया है। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के लिए ₹490.65 करोड़ का इंसेंटिव घोषित किया गया, जिसे अब तक का सबसे बड़ा कर्मचारी प्रोत्साहन माना जा रहा है। इसके अलावा निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन ₹20,000 तय करने की घोषणा भी की गई, जिसके लिए अतिरिक्त ₹140 करोड़ का बजट रखा गया है।
कार्यक्रम में IFFCO ने अपने नए क्षेत्रों और योजनाओं का भी प्रदर्शन किया। इसमें भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCEL), IFFCO-Tokio जनरल इंश्योरेंस, IFFCO बाज़ार, किसान रूरल फाइनेंस और भारत टैक्सी जैसी पहलें शामिल रहीं। IFFCO ने यह भी साफ किया कि वह आने वाले समय में किसानों के लिए नई तकनीक और आधुनिक सेवाओं में निवेश बढ़ाता रहेगा।
सतत कृषि (Sustainable Agriculture) को लेकर भी IFFCO ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संस्था अब नैनो फर्टिलाइजर के उपयोग को बढ़ावा देने और छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। IFFCO का मानना है कि खेती में नई तकनीक और सहकारी मॉडल का सही इस्तेमाल ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बना सकता है।
IFFCO की 55वीं AGM सिर्फ एक वार्षिक बैठक नहीं रही, बल्कि यह महिलाओं की ताकत, सहकारिता की शक्ति और ग्रामीण भारत के बदलते भविष्य का बड़ा संदेश बनकर सामने आई।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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