काम की बात: अगर सही फाइल किया है ITR तो रिफंड 48 घंटे में मिलेगा वरना...
मुख्य बातें
- 50,000 रुपये तक के रिफंड वाले मामलों में अगर सिस्टम को रिटर्न में दी गई जानकारी सही लगती है, तो रिफंड की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाती है
- रिटर्न में गलती नहीं होने पर तेजी से प्रोसेसिंग हो रही है
- जबकि, बड़े रिफंड और संदिग्ध दावों की जांच हो रही है

Tax Refund: अगर टैक्सपेयर ने आयकर रिटर्न (ITR) में सही जानकारी दी है और सभी डॉक्यूमेंट्स ठीक हैं, तो उसे रिफंड अब पहले के मुकाबले काफी तेजी से मिलेगा। इसके लिए आयकर विभाग ने रिटर्न प्रोसेसिंग और रिफंड जारी करने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। बिना जांच वाले मामलों में आयकर रिफंड 24 से 48 घंटे के अंदर करदाता के खाते में पहुंच जाएगा।
हालांकि, यह सुविधा केवल सीधे और कम रिस्क वाले मामलों में ही मिल रही है। आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 50,000 रुपये तक के रिफंड वाले मामलों में अगर सिस्टम को रिटर्न में दी गई जानकारी सही लगती है, तो रिफंड की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाती है। वहीं, 50 हजार रुपये से अधिक के रिफंड वाले मामलों में पहले दस्तावेजों और दावों का मिलान किया जाता है।
ऐसे मामलों में रिफंड आने में आमतौर पर दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में रिफंड को लेकर कई चीजों को सत्यापित किया जाना जरूरी होता है, उसमें अलग से जांच की जा रही है। खासकर उन मामलों में, जहां आयकर बचाने के लिए एनजीओ को दान से लेकर राजनीतिक दलों को चंदा दिए जाने की रसीद लगाई जाती है, उन सभी मामलों में गहन जांच की जाती है।
दस्तावेजों का मिलान जरूरी
विभाग के अनुसार, यदि करदाता ने आय, टीडीएस, बैंक ब्याज, कैपिटल गेन या कटौतियों से जुड़ी जानकारी गलत दी है या दान, एचआरए और अन्य रिबेट्स के दावे संदिग्ध लगते हैं, तो रिटर्न को जांच के लिए रोका जा सकता है। इसलिए सलाह दी जाती है कि रिटर्न भरने से पहले फॉर्म-16, फॉर्म-26एएस, वार्षिक सूचना विवरण (AIS) और करदाता सूचना सारांश (TIS) का मिलान जरूर कर लें।
एचआरए के लिए दूसरा पता देना जरूरी
आयकर विभाग ने इस बार आईटीआर फॉर्म में नया कॉलम भी जोड़ा है। नौकरीपेशा लोगों को अब स्थायी पते के साथ वर्तमान निवास का पता देना भी जरूरी होगा। इसका उद्देश्य करदाताओं का सही पता दर्ज करना और रिटर्न की जांच को अधिक सटीक बनाना है।
काफी संख्या में लोग नौकरी के चलते अपने मूल निवास से बाहर रहते हैं। दूसरा पता मांगे जाने के पीछे आयकर विभाग का उद्देश्य करदाता से जुड़े पते को दुरुस्त रखना है। यह नया नियम उन सभी कर्मचारियों के लिए है, जो पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत एचआरए का लाभ ले रहे हैं।
एचआरए के दावों पर रहेगी विशेष नजर
आयकर विभाग ने यह बदलाव मकान किराया भत्ता (एचआरए) से जुड़े मामलों की जांच और सत्यापन करने के लिए भी किया है। कई मामलों में देखने को मिला है कि काफी लोग रहते दूसरे शहर में हैं और एचआरए का दावा करते हुए रसीद किसी दूसरे शहर की लगा देते हैं। या फिर लोग किराए के मकान पर नहीं रहते हैं, लेकिन फिर भी फर्जी तरीके से रसीद लगातर एचआरए का दावा करते हैं। ऐसी स्थिति में दूसरा पता लेने का मकसद एचआरए की सत्यता को जांचना भी हैं।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


