अक्षय तृतीया पर सोने की मांग में भारी गिरावट, महंगाई ने घटाई त्योहारी खरीदारी
Gold Demand: पिछले अक्षय तृतीया के मुकाबले सोने के भाव इसबार लगभग 63% अधिक रहा। ऐसे में सोने की कीमतों में तेज उछाल ने गहनों की मांग को बुरी तरह प्रभावित किया। मात्रा के हिसाब से खरीदारी कम रही।

भारत के प्रमुख त्योहार अक्षय तृतीया पर सोने की मांग काफी कम रही। सोने के रिकॉर्ड ऊंचे भाव ने गहनों की खरीदारी पर ब्रेक लगा दिया, हालांकि निवेश की मांग में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई। बता दें पिछले अक्षय तृतीया के मुकाबले सोने के भाव इसबार लगभग 63% अधिक रहा। अक्षय तृतीया को धनतेरस के बाद सोना खरीदने का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। इस दिन धातु खरीदना शुभ माना जाता है।
कीमतों ने तोड़ा जनता का उत्साह
रॉयटर्स की खबर के मुताबिक पुणे स्थित जौहरी पीएन गाडगिल एंड संस के सीईओ अमित मोडक ने बताया, " सोने की कीमतों में तेज उछाल ने गहनों की मांग को बुरी तरह प्रभावित किया। मात्रा के हिसाब से खरीदारी कम रही। लेकिन कीमतें बढ़ी होने के कारण पैसे के हिसाब से खर्च पिछले साल से अधिक रहा।"
सोने के दाम: आंकड़े बता रहे हैं कहानी
ग्लोबल मार्केट में सोना 29 जनवरी को 5,594.82 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब यह लगभग 4,861 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। भारत में सोने के वायदा शुक्रवार को 154,609 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए थे। यह पिछले अक्षय तृतीया के मुकाबले लगभग 63% अधिक है।
राज्य-दर-राज्य: कहां कितनी मांग?
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, कुछ दक्षिण भारतीय राज्यों को छोड़कर, पूरे देश में सामान्य से कम मांग रही। मुंबई के एक जौहरी ने बताया कि गहनों की जगह लोग अब सोने के सिक्के खरीदने लगे हैं। सिक्कों को बेचना आसान होता है। जौहरियों ने मेकिंग चार्ज पर छूट दी, फिर भी खरीदार नहीं आए।
अब सिर्फ त्योहार पर ही नहीं, पूरे साल खरीदारी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक आभूषण मांग 24% की गिरावट आई जबकि, निवेश मांग 17% की बढ़ोतरी (2013 के बाद सबसे अधिक) रही। मुंबई के एक बुलियन डीलर ने बताया कि भारत में सोने की खरीदारी का पैटर्न बदल रहा है। अब खरीदारी सिर्फ त्योहारों तक सीमित नहीं है। कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहक पूरे साल जब भी कीमतें गिरती हैं, खरीदारी करते हैं।
सरकार ने जारी किया आदेश
भारत सरकार ने शुक्रवार को उन बैंकों की सूची जारी कर दी जो सोना और चांदी आयात कर सकते हैं। इससे उन बैंकों को राहत मिली, जो सूची देरी से आने की वजह से आयात बंद करने को मजबूर थे। बता दें सोना महंगाई से बचाने वाला निवेश माना जाता है (हेज)। लेकिन, अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना ब्याज देने वाले सोने की मांग घट जाती है , क्योंकि लोग ब्याज देने वाली एसेट्स (जैसे बॉन्ड) को प्राथमिकता देते हैं।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


