ईरान-इजरायल युद्ध से दुनिया भर में पेट्रोल और LPG के दाम पर कितना पड़ा असर?
भारत-पाकिस्तान को छोड़ अधिकतर देशों में पिछले एक सप्ताह में पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। कुवैत में पेट्रोल 31.511 रुपये, जबकि सऊदी अरब में बढ़कर 57.221 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। अजरबैजान में LPG की कीमत बढ़कर 37.952 रुपये तक पहुंच गई

ईरान-इजरायल युद्ध के चलते दुनियाभर में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, पीएनजी, एलनजी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच ईंधन की कीमतों को लेकर जारी उतार-चढ़ाव के बीच globalpetrolprices के 2 मार्च 2026 और 9 मार्च 2026 के ताजा आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि पिछले एक सप्ताह में पेट्रोल और एलपीजी की कीमतों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, भारत में एलपीजी के दाम 115 रुपये प्रति सिलेंडर तक बढ़े और पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 55 रुपये लीटर तक महंगे हो गए। हालांकि, दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल और एलपीजी बेचने वाले कई देशों में मामूली बढ़ोतरी या गिरावट जरूर दिखी, लेकिन कुल मिलाकर वैश्विक बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहा। इसका असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी दिखाई दे रहा है।
9 मार्च 2026 तक दुनिया भर में एलपीजी की औसत कीमत 73.56 भारतीय रुपये प्रति लीटर है, लेकिन अलग-अलग देशों में इसकी कीमत में काफी अंतर देखने को मिलता है। आमतौर पर अमीर देशों में एलपीजी महंगी होती है, वहीं गरीब देशों और प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने वाले देशों में यह काफी सस्ती मिलती है।
कीमतों में यह फर्क अलग-अलग देशों में लगने वाले टैक्स और मिलने वाली सब्सिडी की वजह से होता है। सभी देश अंतरराष्ट्रीय बाजार से एक ही कीमत पर प्राकृतिक गैस खरीदते हैं, लेकिन अपने हिसाब से टैक्स लगाने के बाद इसकी रिटेल प्राइस अलग-अलग हो जाती है। कई देशों की कीमतें महीने में एक बार अपडेट होती हैं, क्योंकि वहां ईंधन बाजार नियंत्रित (रेगुलेटेड) होता है और कीमतों में जल्दी-जल्दी बदलाव नहीं होता।
पेट्रोल की कीमतें
पेट्रोल की कीमतों पर नजर डालें तो 2 मार्च और 9 मार्च के बीच ज्यादातर देशों में बहुत छोटा बदलाव दर्ज किया गया। उदाहरण के तौर पर लीबिया में पेट्रोल 2.170 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 2.173 रुपये हो गया, जबकि ईरान में यह 2.631 रुपये से बढ़कर 2.636 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। वेनेजुएला में भी मामूली बढ़त देखी गई और कीमत 3.220 रुपये से बढ़कर 3.226 रुपये प्रति लीटर हो गई।
मध्य-पूर्व और तेल उत्पादक देशों में भी कीमतें लगभग स्थिर रहीं। कुवैत में पेट्रोल 31.425 रुपये से बढ़कर 31.511 रुपये प्रति लीटर हुआ, जबकि सऊदी अरब में यह 57.111 रुपये से बढ़कर 57.221 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। ओमान और बहरीन में भी इसी तरह हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इन आंकड़ों से साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल की कीमतों में फिलहाल बड़ा झटका नहीं आया है।
दुनिया में एलपीजी की कीमतों पर क्या पड़ा असर
एलपीजी का विश्लेषण भी लगभग यही तस्वीर दिखाता है। 2 मार्च के मुकाबले 9 मार्च को कई देशों में एलपीजी के दाम मामूली बदले हैं। अल्जीरिया में एलपीजी 8.438 रुपये से घटकर 8.408 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि अंगोला में कीमत 10.031 रुपये से बढ़कर 10.051 रुपये हो गई।
रूस में एलपीजी की कीमत 37.887 रुपये से घटकर 37.286 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई, जो एक उल्लेखनीय गिरावट मानी जा रही है। वहीं अजरबैजान में कीमत 35.171 रुपये से बढ़कर 37.952 रुपये तक पहुंच गई, जो इस सूची में अपेक्षाकृत बड़ी बढ़त है।
कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय अपेक्षाकृत संतुलित स्थिति में है। बड़े तेल उत्पादक देशों में कीमतें स्थिर रहने से आयात करने वाले देशों को भी राहत मिल रही है। अगर संकट जारी रहता है तो आने वाले समय में पेट्रोल और एलपीजी के दामों में बड़े उतार-चढ़ाव की बड़ी संभावना दिखाई देती है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


