सोना-चांदी के भाव युद्ध शुरू होने से अबतक कितना गिरे? सस्ता होने के क्या हैं 5 कारण

Mar 16, 2026 02:10 pm ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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Gold Silver Price Analysis:  27 फरवरी 2026 को सोना 1,59,097 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। 28 फरवरी को इजरायली हमले के बाद बाजार खुलने पर सोने ने तेजी दिखाई, लेकिन उसके बाद से अब तक सोने की कीमत में 2,661 रुपये और चांदी में 15,107 रुपये की गिरावट आ चुकी है।

सोना-चांदी के भाव युद्ध शुरू होने से अबतक कितना गिरे? सस्ता होने के क्या हैं 5 कारण

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सर्राफा बाजार पर उल्टा असर देखने को मिल रहा है। आम धारणा के विपरीत, जहां युद्ध जैसे हालात में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, वहीं इस बार कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि हालिया दिनों में जारी इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं।

आज का भाव: सोना 1,963 रुपये लुढ़का

भारतीय सर्राफा बाजार में आज 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,963 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई। 10 ग्राम सोने का भाव गिरकर 1,56,436 रुपये पर आ गया है। वहीं, चांदी ने भी निवेशकों को निराश किया है। चांदी के भाव में 7,695 रुपये की कमी आई है और यह 2,52,793 रुपये प्रति किलो के स्तर पर कारोबार कर रही है।

16 मार्च तक का हाल

IBJA के आंकड़ों पर नजर डालें तो 27 फरवरी 2026 को सोना 1,59,097 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। 28 फरवरी को इजरायली हमले के बाद बाजार खुलने पर सोने ने तेजी दिखाई, लेकिन उसके बाद से अब तक (16 मार्च दोपहर 12:15 बजे तक) सोने की कीमत में 2,661 रुपये और चांदी में 15,107 रुपये की गिरावट आ चुकी है।

सोने की चमक फीकी पड़ने के 5 प्रमुख कारण

पिछले कुछ समय से आ रही इस गिरावट को लेकर बाजार जानकारों ने कई अहम वजहें गिनाई हैं। केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया के अनुसार, यह गिरावट एक साथ कई कारकों का नतीजा है।

1. सट्टेबाजों पर नकेल

बाजार नियामक ने सोने के कारोबार में मार्जिन की दरें बढ़ा दी हैं। इससे छोटे निवेशकों और सट्टेबाजों के लिए कारोबार करना महंगा हो गया है। ऊंची मार्जिन राशि के चलते बाजार में तेजी लाने वाले सट्टेबाज किनारे लग गए हैं, जिससे कीमतों में नरमी आई है।

2. शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का साइड इफेक्ट

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव का सबसे पहले असर शेयर बाजार पर पड़ता है। जिन निवेशकों को शेयरों में नुकसान होता है, वे अपने मुनाफे वाले निवेश को बेचकर पैसा निकालते हैं। सोना, जो आमतौर पर मुनाफे में होता है, इस बिकवाली का सबसे बड़ा शिकार बनता है।

3. निवेश की रफ्तार हुई धीमी

रिकॉर्ड तोड़ तेजी के बाद अब सोने में नए निवेश का प्रवाह सुस्त पड़ गया है। लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से सोना मजबूत विकल्प बना हुआ है, लेकिन फिलहाल निवेशक नई खरीदारी से बच रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिरता बनी हुई है और बड़ी तेजी के आसार कम हैं।

4. डॉलर की मजबूती ने बढ़ाई मुश्किल

अमेरिकी डॉलर में हालिया मजबूती ने सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। डॉलर के मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग कम हो जाती है और कीमतें गिर जाती हैं।

5. युद्ध का तात्कालिक असर हुआ खत्म!

विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद, जो 5,000 रुपये का उछाल आया था, वह महज एक तात्कालिक प्रतिक्रिया थी। अब बाजार वैश्विक मांग, डॉलर और अन्य आर्थिक संकेतकों के हिसाब से ढल रहा है, जिससे कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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