पेट्रोल-डीजल के रेट में राहत कब तक रहेगी बरकरार? कच्चा तेल अब भी 108 के पार
मुख्य बातें
- Petrol Diesel Prices: कच्चे तेल के दाम लगातार 100 डॉलर के ऊपर चढ़े हुए हैं
- ऐसे में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर बोझ बढ़ रहा है
- क्योंकि, एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है

कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट के बावजूद आज सुबह छह बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा था। जबकि, WTI 105 डॉलर के करीब था। आज भी भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट में राहत बरकरार है, लेकिन सवाल यह है कि यह राहत कितने दिनों तक रहेगी? 16 सितंबर के रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 102.12 और डीजल 95.20 रुपये लीटर है।
बता दें भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक देश है। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के शुरुआती दौर में जब कच्चे तेल के दाम अंधाधुंध बढ़ रहे तो पाकिस्तान, बंग्लादेश, चीन, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, भूटान जैसे पड़ेसियों के साथ-साथ दुनिया के तमाम देश महंगाई बोझ जनता पर डाल रहे थे।
उस समय भारत के 5 राज्यों में चुनाव चल रहे थे और पूरे 76 दिन तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े। सरकार ने सारा बोझ अपने ऊपर लिया और यहां तक पेट्रोल-डीजल से एक्साइज ड्यूटी भी 10-10 रुपये कम कर दिया। चुनाव खत्म होने के बाद मई में तेल की कीमतें चार बार में 7.50-7.50 रुपये बढ़े।
अब हाल फिलहाल कहीं चुनाव भी नहीं है। कच्चे तेल के दाम लगातार 100 डॉलर के ऊपर चढ़े हुए हैं। ऐसे में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर बोझ बढ़ रहा है। क्योंकि, एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।
इस साल पहले ही करीब 80% चढ़ चुका है ब्रेंट
कच्चे तेल के लिए 2026 पहले ही काफी उथल-पुथल वाला साल रहा है। ब्रेंट अब तक करीब 80 फीसदी चढ़ चुका है। हालांकि अप्रैल में बने हाई 126 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा ऊपर के मुकाबले अभी कीमत कम है। लेकिन, चिंता यह है कि अगर मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होती है और चीन की तेल मांग भी बढ़ती है, तो कीमतें फिर से अपने पुराने ऊंचे स्तरों की तरफ जा सकती हैं।
पेट्रोल-डीजल के लिए क्यों महत्वपूर्ण है $100 से ऊपर का तेल?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल लंबे समय तक महंगा रहने पर घरेलू ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ब्रेंट के 108 डॉलर होते ही भारत में अगले दिन पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाएगा। पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत पर कच्चे तेल के अलावा डॉलर-रुपया विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, टैक्स, मार्जिन और तेल कंपनियों की प्राइसिंग पॉलिसी जैसे कई कारकों का असर होता है।
महंगाई पर भी असर: कच्चा तेल महंगा होने का असर पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता।डीजल महंगा होने पर ट्रक और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। इसका असर सब्जी, अनाज, दूध और दूसरी रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।


