पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदें खत्म! कच्चा तेल 85 डॉलर के पार
मुख्य बातें
- तेल की कीमतें करीब एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं
- सोमवार को तेल की कीमतें 9% से अधिक बढ़ने के बाद मंगलवार को भी उनमें इजाफा जारी रहा
- कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम घटने के बजाय बढ़ने के आसार बढ़ गए हैं

ईरान- अमेरिका युद्ध की आग में कच्चे तेल के दाम में भयंकर उबाल है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को तेल की कीमतें 9% से अधिक बढ़ने के बाद मंगलवार को भी उनमें इजाफा जारी रहा। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ईरानी जहाजों पर फिर से नाकाबंदी लागू कर दी है। साथ ही, उन्होंने इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले हर दूसरे मालवाहक जहाज पर भी फीस की मांग की है।
अमेरिकी मानक क्रूड (WTI) की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड सोमवार को 83.30 डॉलर पर बंद हुआ। आज यह 85 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। ट्रंप ने कार्गो पर 20% चार्ज (लगभग पूरी सुपरटैंकर पर 30 मिलियन डॉलर) की मांग की है। इस बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ तीसरी रात हमले किए हैं, जो आने वाले कई दिनों तक जारी रह सकते हैं।
बता दें कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम घटने के बजाय बढ़ने के आसार बढ़ गए हैं। ईरान युद्ध के दौरान जब कच्चा तेल 100 डॉलर के करीब पहुंचा था तब मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल से 10-10 रुपये टैक्स हटा लिए थे। इससे ईंधन की कीमतों पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ा। चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम 7.50-7.50 रुपये बढ़े, जो दुनिया के कई देशों की तुलना में बेहद कम है।
एक महीने के हाई पर तेल की कीमतें
तेल की कीमतें करीब एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे दूसरी तिमाही में हुई करीब 30% की गिरावट कुछ हद तक कम हो गई है। बढ़ते संकट ने फारस की खाड़ी से ऑयल सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। बता दें कि अमेरिकी नौसेना की दो नाकाबंदियों के बीच थोड़े से अंतराल में ईरान ने कम से कम 57 मिलियन बैरल कच्चा तेल निर्यात कर लिया था।
इन्फ्रास्ट्रक्चर कैपिटल मैनेजमेंट के सीईओ जे हैटफील्ड ने कहा, "वे (ईरानी) बस अविश्वसनीय रेट पर तेल भेज रहे थे। हमारा मानना है कि कीमतें 80 डॉलर के आसपास रहेंगी, जब तक कि स्ट्रेट को लेकर कोई नई हलचल न हो। लेकिन, मुझे नहीं लगता कि कीमत 90 या 100 डॉलर तक जाएगी। और अगर स्ट्रेट फिर से खुल गया, तो हम बहुत तेजी से 60 डॉलर पर आ जाएंगे।"
अमेरिकी नाकाबंदी और खाड़ी देशों पर शुल्क
ज्वाइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर ने बताया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड मंगलवार को न्यूयॉर्क समयानुसार शाम 4 बजे से सभी ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों की नाकाबंदी लागू करेगा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को होर्मुज में अपनी सुरक्षा सेवाओं के बदले सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन और कुवैत से फीस मिलेगी।
तेल उत्पादन में बदलाव
पिछले एक महीने में, फारस की खाड़ी के उत्पादक देशों ने अस्थायी समझौते के बाद निर्यात संबंधी चिंताएं कम होने पर अतिरिक्त क्रूड बेचना शुरू कर दिया था। खास तौर पर यूएई ने शटल टैंकरों (जिनके ट्रांसपोंडर बंद रखे जाते थे) के जरिए तेल भेजकर काफी सफलता हासिल की।
ब्लूमबर्ग को मिली एक मासिक रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने ओपेक को बताया कि जून में उसका कच्चा तेल उत्पादन बढ़कर 3.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया, जो मई से 1.71 मिलियन बैरल अधिक है। यह उछाल ईरान संघर्ष के विकल्प खोजने और ओपेक से अलग होने के बाद उत्पादन बढ़ाने का नतीजा है।
रूस पर प्रतिबंधों की संभावना
इन सबके अलावा, एक व्हाइट हाउस अधिकारी (जिन्होंने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी दी) ने बताया कि ट्रंप दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा प्रस्तावित रूसी प्रतिबंध विधेयक का समर्थन करेंगे। इससे रूसी तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वालों को दंडित करने तथा क्रेमलिन पर यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाने के प्रयासों को फिर से जीवन मिलेगा।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


