पति-पत्नी ने चुना अलग-अलग Tax रिजीम? होम लोन पर टैक्स छूट किसे मिलेगी, जानिये नियम
मुख्य बातें
- Income Tax: अगर पति-पत्नी ने मिलकर होम लोन लिया है और कई सालों से उस पर टैक्स छूट का फायदा उठा रहे हैं, तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) में अलग-अलग टैक्स रिजीम चुनने पर नियम बदल सकते हैं

Income Tax: अगर पति-पत्नी ने मिलकर होम लोन लिया है और कई सालों से उस पर टैक्स छूट का फायदा उठा रहे हैं, तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) में अलग-अलग टैक्स रिजीम चुनने पर नियम बदल सकते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पति-पत्नी में से कौन होम लोन पर टैक्स छूट का दावा कर सकता है और कौन नहीं। दरअसल, इनकम टैक्स कानून के तहत पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग टैक्सपेयर माना जाता है। इसलिए दोनों अपनी सुविधा के अनुसार पुराना टैक्स रिजीम या नया टैक्स रिजीम चुन सकते हैं। लेकिन होम लोन पर मिलने वाला टैक्स छूट इस बात पर निर्भर करेगा कि किसने कौनसी टैक्स रिजीम चुनी है।
पुरानी टैक्स रिजीम में मिलती है होम लोन पर छूट
अगर पति या पत्नी में से कोई पुरानी टैक्स रिजीम चुनता है और वह घर का को-ओनर है, होम लोन का सह-उधारकर्ता (Co-borrower) है और ईएमआई (EMI) का पेमेंट भी करता है, तो वह होम लोन पर टैक्स छूट का क्लेम कर सकता है।
ऐसे व्यक्ति को होम लोन के मूलधन के पेमेंट पर इनकम टैक्स अधिनियम 1961 की धारा 80C (नए इनकम टैक्स अधिनियम 2025 की धारा 123) के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है। वहीं, स्वयं के रहने वाले घर यानी सेल्फ ऑकुपाइड के लिए होम लोन के ब्याज पर सेक्शन 24(b) (नए कानून की धारा 22(b)) के तहत अधिकतम 2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलता है।
दोनों पति-पत्नी को कब मिलेगा फायदा?
अगर पति और पत्नी दोनों पुरानी टैक्स रिजीम चुनते हैं और दोनों सभी जरूरी शर्तें पूरी करते हैं, तो दोनों अलग-अलग टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। यानी दोनों मिलकर मूलधन पर कुल 3 लाख रुपये और ब्याज पर कुल 4 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं। हालांकि, सिर्फ होम लोन में को-एप्लिकेंट होने से यह फायदा नहीं मिलेगा। टैक्स छूट लेने के लिए तीन शर्तें पूरी करना जरूरी है।
दोनों घर के सह-स्वामी यानी को-ओनर हों।
दोनों होम लोन के सह-उधारकर्ता यानी खरीदरार हों।
दोनों ईएमआई के पेमेंट में अपनी हिस्सेदारी निभाते हों।
नए टैक्स रिजीम में क्या नियम हैं?
अगर पति या पत्नी में से कोई नई टैक्स रिजीम चुनता है और घर स्वयं के रहने के लिए है, तो उसे होम लोन के मूलधन या ब्याज पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, यदि मकान किराये पर दिया गया है, तो नई टैक्स रिजीम में भी होम लोन के ब्याज को किराये की इनकम कैलकुलेशन करते समय शामिल किया जा सकता है। लेकिन इससे होने वाले नुकसान (Loss) को सैलरी या अन्य इनकम के साथ एडजस्ट नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि नई टैक्स रिजीम में होम लोन का टैक्स फायदा काफी सीमित हो जाता है।
किराये वाले मकान पर अलग नियम
पुरानी टैक्स रिजीम में अगर मकान किराये पर दिया गया है, तो दोनों पति-पत्नी अपने-अपने हिस्से के अनुसार ब्याज की कटौती का दावा कर सकते हैं। हालांकि, एक फाइनेंशियल ईयर में हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले नुकसान में से अधिकतम 2 लाख रुपये तक ही दूसरी इनकम के साथ एडजस्ट किए जा सकते हैं। बचा हुआ नुकसान तय शर्तों के साथ अगले आठ सालों तक आगे ले जाया जा सकता है।
क्या करें पति-पत्नी?
टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि पति-पत्नी को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि दोनों को एक ही टैक्स रिजीम चुनना होगा। दोनों अपनी-अपनी इनकम टैक्स और होम लोन की स्थिति को ध्यान में रखकर अलग-अलग टैक्स रिजीम चुन सकते हैं।


